वर्ष 2047 तक राजस्थान में सभी नागरिकों के लिए सुलभ, सुगम और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें एलोपैथिक और आयुष पद्धतियों का समेकित उपयोग होगा। लक्षित पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से एनीमिया व कुपोषण का उन्मूलन किया जाएगा। लक्ष्य — औसत आयु >77 वर्ष व शिशु मृत्यु दर 10 से कम (प्रति 1,000 जीवित जन्म)।
| संकेतक | वर्तमान | 2030 | 2035 | 2040 | 2047 |
|---|---|---|---|---|---|
| जीवन प्रत्याशा (वर्ष) | 69.9 | >72.0 | >73.5 | >75.0 | >77.0 |
| मातृ मृत्यु दर (MMR) | 87 | <70 | <52 | <35 | <15 |
| शिशु मृत्यु दर (IMR) | 30 | <20 | <17 | <14 | <10 |
| सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) % | 88 | 100 | 100 | 100 | 100 |
| आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर (OOPE) % | 37.1 | <15.0 | <12.5 | <10.0 | 80* |
| राज्य स्वास्थ्य सूचकांक रैंक | 16वाँ | शीर्ष 5 | शीर्ष 5 | शीर्ष 4 | शीर्ष 3 |
| संकेतक | वर्तमान | 2030 | 2035 | 2040 | 2047 |
|---|---|---|---|---|---|
| जिला आयुर्वेद अस्पताल | 33 | 41 | प्रत्येक जिले में एक | प्रत्येक जिले में एक | |
| ब्लॉक स्तरीय आयुष अस्पताल | 84 | 230 | 265 → 300 | प्रत्येक ब्लॉक में एक | |
| आयुर्वेद फार्मेसी | 5 | 6 | 7 (समेकित चरण) | प्रत्येक संभागीय मुख्यालय पर एक | |
| जिला होम्योपैथी अस्पताल | 1 | 4 | 6 | 7 | प्रत्येक संभाग पर एक |
| संकेतक | वर्तमान | 2030 | 2035 | 2040 | 2047 |
|---|---|---|---|---|---|
| मेडिकल कॉलेजों की स्थापना | 43 | 50 | 55 | 60+ | प्रत्येक जिला |
| एकीकृत चिकित्सा शिक्षण केंद्र | 2 | 7 | 25% मेडिकल कॉलेज | 50% मेडिकल कॉलेज | सभी मेडिकल कॉलेज |
| RIMS (क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान) | - | 1 | 25% संभाग | 50% संभाग | सभी संभाग |
| शीर्ष प्रशिक्षण संस्थान | - | 1 | 2 | 3 | सभी संभाग |
| सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएँ | 15 | 33 | 40 | 50+ | सभी मेडिकल कॉलेज |
| सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक | 4 | 7 | 7 | 7 | 7 |
| सुदृढ़ ट्रॉमा/आपातकालीन विंग | 15 | 33 | 40 | 50+ | सभी मेडिकल कॉलेज |
| कैंसर केयर उत्कृष्टता केंद्र | 1 | 2 | 3 | 4 | सभी संभाग |
| मोबाइल कैंसर स्क्रीनिंग वैन्स | 7 | 33 | 41 | 41 | 41 |
| कैंसर देखभाल अवसंरचना | 6 | 33 | 41 | 50+ | सभी मेडिकल कॉलेज |
| मरीज़ों के डेटा का AI के साथ एकीकरण | - | 33 | 41 | 50+ | सभी मेडिकल कॉलेज |
| संकेतक | राजस्थान | भारत | ||
|---|---|---|---|---|
| 2015-16 | 2019-21 | 2015-16 | 2019-21 | |
| नवजात मृत्यु दर (प्रति 1000) | 29.8 | 20.2 | 29.5 | 24.9 |
| शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000) | 41.3 | 30.3 | 40.7 | 35.2 |
| 5 वर्ष से कम मृत्यु दर (प्रति 1000) | 50.7 | 37.6 | 49.7 | 41.9 |
| संस्थागत जन्म % | 84 | 94.9 | 78.9 | 88.6 |
| पूर्ण टीकाकरण % | 54.8 | 80.4 | 62 | 76.4 |
| कुल प्रजनन दर | 2.4 | 2.0 | 2.2 | 2.0 |
| गर्भवती महिलाओं में एनीमिया % | 46.6 | 46.3 | 50.4 | 52.2 |
| 5 वर्ष से कम — कद में कम (stunted) % | 39.1 | 31.8 | 38.4 | 35.5 |
| 5 वर्ष से कम — दुबले (wasted) % | 23 | 16.8 | 21 | 19.3 |
| 5 वर्ष से कम — वजन में कम % | 36.7 | 27.6 | 35.8 | 32.1 |
| MMR (प्रति लाख जीवित जन्म) | राजस्थान | भारत | ||
|---|---|---|---|---|
| 2018-20 | 2021-23 | 2018-20 | 2021-23 | |
| MMR | 113 | 86 | 97 | 88 |
राजस्थान की MMR (86) अब राष्ट्रीय औसत (88) से भी कम है — माताओं के स्वास्थ्य पर बेहतर ध्यान देने का परिणाम।
| एलोपैथिक संस्थान | संख्या |
|---|---|
| अस्पताल | 267 |
| प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (2,534 ग्रामीण + 55 शहरी) | 2,589 |
| उप-केंद्र | 15,292 |
| सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र | 832 |
| मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र | 118 |
| कुल बेड | 76,210 |
| औषधालय | 183 |
| शहरी आयुष्मान आरोग्य मन्दिर (NUHM के अंतर्गत) | 638 |
वर्तमान में राज्य में 7 होम्योपैथिक अस्पताल, 189 औषधालय, 60 एकल चिकित्सा इकाइयाँ, 83 राजकीय ब्लॉक आयुष अस्पताल, 225 ब्लॉक होम्योपैथिक औषधालय, 2 मोबाइल इकाइयाँ तथा 3 जिला आयुष अस्पताल कार्यरत हैं।
| संस्था | संख्या |
|---|---|
| आयुर्वेदिक अस्पताल | 127 |
| आयुर्वेदिक औषधालय | 3575 |
| योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा औषधालय | 03 |
| योग और प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान केंद्र | 33 |
| योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अस्पताल | 03 |
| सर्जिकल एंबुलेटरी थेरेपी यूनिट | 1 |
| एंबुलेटरी थेरेपी इकाइयां | 13 |
| आंचल प्रसूता केंद्र | 45 |
| जरावस्था ज्ञान व्याधि निवारण केंद्र | 45 |
| पंचकर्म केंद्र | 82 |
| क्षारसूत्र केंद्र | 10 |
| ब्लॉक आयुष अस्पताल | 86 |
| मोबाइल इकाइयों | 14 |
यूनानी चिकित्सा प्रणाली विश्व स्तर पर सबसे पुरानी उपचार प्रणालियों में से एक है — राज्य में 12 चिकित्सालय, 119 औषधालय, 7 मोबाईल यूनिट व 142 जिला चिकित्सालय/CHC/PHC इकाइयों के साथ-साथ 102 सह आयुर्वेद संचालित इकाइयां व हिजामा थैरेपी के लिए 1 उत्कृष्टता केंद्र कार्यरत है।
वर्तमान में 17 शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 286 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 638 शहरी आयुष्मान आरोग्य मन्दिर संचालित हैं।
पात्र परिवार: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में सम्मिलित परिवार, सामाजिक-आर्थिक व जाति आधारित जनगणना में चिन्हित, छोटे व सीमान्त किसान, संविदाकर्मी, EWS, कोविड-19 अनुग्रह योजना के लाभार्थी, 70+ वर्ष के वरिष्ठ नागरिक। शेष आबादी ₹850/वर्ष/परिवार देकर जुड़ सकती है।
लाभ: प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹25 लाख तक कैशलेस उपचार — बीमा मोड में ₹5 लाख तक + ट्रस्ट मोड में ₹20 लाख तक। नए चरण में प्रीमियम ₹2,370/परिवार, 2,179 पैकेज कवर (2,002 बीमा मोड + 177 ट्रस्ट मोड)। कुल 1,819 पैकेज (1,761 बीमा मोड + 58 ट्रस्ट मोड)। अंग प्रत्यारोपण व कॉक्लियर इम्प्लांट भी शामिल। 132 नए पैकेज (सर्जरी, मानसिक स्वास्थ्य, आयुष, जेरियाट्रिक) जोड़े गए। ~1.36 करोड़ परिवार पंजीकृत। अप्रैल 2025 से in-bound portability, दिसंबर 2025 से out-bound portability।
सभी राजकीय चिकित्सालयों में IPD/OPD मुफ्त। मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा एवं निःशुल्क जांच योजना के विस्तार के रूप में शुरू। सूची में 1,238 दवाइयाँ, 428 सर्जिकल वस्तुएं, 156 सूचर्स शामिल।
'मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सहायता योजना' के तहत दुर्लभ रोगों से पीड़ित बच्चों को ₹50 लाख तक मुफ्त इलाज + ₹5,000/माह अतिरिक्त सहायता। अब तक 224 बच्चे प्रमाणित।
CGHS की तर्ज पर राज्य कर्मचारियों/पेंशनभोगियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा। जन आधार से पंजीकरण। सभी सरकारी + 741+ निजी सूचीबद्ध अस्पताल + 3,748 फार्मा स्टोर + 39+ राज्य के बाहर अस्पताल। आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, सिद्धा भी शामिल। ~13.65 लाख परिवार कवर।
70 वर्ष व उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को ₹5 लाख तक कैशलेस कवरेज।
जिन क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों में सोनोग्राफी सुविधा नहीं, वहाँ निजी केंद्रों पर 2री/3री तिमाही से निःशुल्क जांच। QR कोड आधारित ई-वाउचर, 30 दिन वैध, प्रसव काल में 2 बार निःशुल्क सोनोग्राफी।
सूचना देने पर अनसेफ फूड प्रमाणन पर ₹51,000, सब्स्टैंडर्ड फूड प्रमाणन पर ₹5,000 प्रोत्साहन राशि, गोपनीयता बरकरार। दिसंबर 2025 तक 14,998 निरीक्षण, 38,647 नमूने एकत्र — 2,764 निम्न गुणवत्ता, 129 गलत ब्रांडिंग, 653 असुरक्षित पाए गए।
खदान/कारखाना/पत्थर कटाई/ग्राइंडिंग में धूल के लंबे संपर्क से होने वाला असाध्य रोग। पीड़ित को ₹3 लाख पुनर्वास सहायता + ₹1,500/माह पेंशन। मृत्यु पर आश्रित परिवार को ₹2 लाख। विधवा पेंशन ₹1,250-1,500/माह (आयु अनुसार)। 'आस्था कार्ड' से BPL जैसी सुविधाएँ (NFSA सहित) + अंतिम संस्कार हेतु ₹10,000। दिसंबर 2025 तक ₹614.86 करोड़ व्यय कर 20,478 पीड़ितों/परिवारों को सहायता।
न्यूनतम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता व पहुंच सुनिश्चित करना। 2.10 लाख नए + 3.41 लाख फॉलो-अप मरीज OPD से लाभान्वित। NMHP के तहत 645 शिविर, 15,069 मरीजों का इलाज।
पेयजल में अधिक फ्लोराइड वाले 30 चिन्हित जिलों में लागू। 2025-26 (दिसम्बर तक): 1,020 गांव फ्लोराइड प्रभावित चिन्हित, 19,805 संदिग्ध रोगियों में से 7,260 की पुष्टि।
255 ब्लड बैंक (58 राज्य + 7 केंद्र + 190 निजी)। दिसंबर 2025 तक 28.60 लाख जांच, 5,522 HIV पॉजिटिव मिले। 53 STI क्लिनिक निःशुल्क। 28 ART केंद्र, 8 PPP ART केंद्र, 21 लिंक ART केंद्र, 17 केयर सपोर्ट केंद्र।
मुख स्वास्थ्य के निर्धारकों में सुधार व ग्रामीण-शहरी दंत सेवा असमानता कम करना।
सुनने की क्षमता बढ़ाना, शहरी-ग्रामीण बहरापन सेवा असमानता कम करना।
60-दिवसीय 'तम्बाकू मुक्त युवा अभियान 3.0' — तम्बाकू मुक्त विद्यालय, COTPA अंतर्गत प्रवर्तन, तम्बाकू मुक्त ग्राम पंचायतें, सोशल मीडिया अभियान।
लक्ष्य — 2030 तक हेपेटाइटिस-C का उन्मूलन। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर मेडिकल कॉलेजों में 4 राज्य स्तरीय मॉडल लैब + 50 NVHCP लैब। 2025-26 (दिसम्बर तक): 8.81 लाख हेपेटाइटिस-B स्क्रीनिंग, 10,555 पॉजिटिव, 1,597 उपचारित।
राजकीय चिकित्सालयों में चरणबद्ध निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच। दिसंबर 2025 तक कुल 101.17 करोड़ निःशुल्क जांचें।
संक्रामक व गैर-संक्रामक रोगों की निगरानी से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट नियंत्रण। IDSP पोर्टल से रियल-टाइम डेटा संकलन। 27 जिला प्रयोगशालाएं जिला जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला के रूप में विकसित; 7 मेडिकल कॉलेज लैब रेफरल नेटवर्क में शामिल।
टाइप-1 डायबिटीज़ पीड़ितों हेतु 70 जिला/उप-जिला चिकित्सालयों में बाल रोग विशेषज्ञों को कौशल प्रशिक्षण। मधुनेत्र के अंतर्गत डायबिटिक रेटिनोपैथी जांच 5 संस्थानों (पाली, ब्यावर, करौली, जालोर, देशनोक CHC) में प्रारंभिक चरण में शुरू।
41 जिलों के 61 जिला चिकित्सालयों में हीमोडायलिसिस सेवाएं, कुल 145 मशीनें कार्यरत।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 के सुझाव अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर (SHC-AAM) के रूप में सक्रिय किया जा रहा है — व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (गर्भावस्था व शिशु जन्म देखभाल, गैर-संचारी रोग जांच, नेत्र-नाक-कान-गला सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य जांच, परिवार नियोजन आदि 12 सेवाएं) प्रदान करते हुए।
| सुविधा का प्रकार | पोर्टल पर कार्यरत AAM | विस्तारित सेवाओं की शुरुआत |
|---|---|---|
| प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) | 2485 | 2113 |
| उप स्वास्थ्य केंद्र (SHC) | 14742 | 6854 |
| शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) | 299 | 292 |
| शहरी आयुष्मान आरोग्य मन्दिर (UAAM) | 332 | 293 |
| आयुष आयुष्मान आरोग्य मन्दिर (AAAM) | 2019 | 2019 |
| कुल | 19877 | 11571 |
लॉन्च: वर्ष 2018 (केंद्र प्रायोजित योजना)। घटक: आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY), आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM), प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)। राजस्थान में कुल 406 कार्यों की स्वीकृति — 131 ब्लॉक स्तरीय सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयाँ (BPHU), 6 एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं (IPHL), 3 क्रिटिकल केयर ब्लॉक (CCB), 429 शहरी आयुष्मान आरोग्य मन्दिर।
ई-संजीवनी HWC पोर्टल से पदानुक्रमित परामर्श सेवाएं। दिसंबर 2024 तक कुल टेली-परामर्श संख्या 20.33 लाख।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (2005) एवं राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (2013) को मिलाकर शुरू किया गया।
चिकित्सा-स्वास्थ्य विभाग व महिला-बाल विकास विभाग के बीच संयुक्त कार्यकर्ता। ग्राम सभा से चयन, ANM व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के साथ समन्वय। सितम्बर 2025 तक राज्य में 54,022 आशा सहयोगिनी कार्यरत। MCHN दिवस व घर-घर RCH गतिविधियों में स्वास्थ्य विभाग व WCD के बीच सेतु का काम करती हैं।
आंगनबाड़ी में जन्मे, सरकारी विद्यालय/मदरसों में पढ़ने वाले 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की 4D जांच: 1. जन्म के समय दोष 2. रोग 3. कमी/विकास में देरी 4. विकलांगता (40 चिन्हित बीमारियां)। मोबाइल स्वास्थ्य टीम द्वारा जांच; निःशुल्क रैफरल, फॉलो-अप व शल्य चिकित्सा उपचार।
RMNCH+A रणनीति के तहत विकसित; शुरुआत में राजस्थान के 15 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में, अब राज्यभर विस्तारित। किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (उज़ाला क्लिनिक) — पोषण, यौन-प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, NCD, चोट व हिंसा, मादक द्रव्यों के सेवन — इन 6 विषयगत क्षेत्रों में नैदानिक व परामर्श सेवाएं।
गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधाओं तक परिवहन प्रदान करती है।
राज्य के लोगों के लिए निःशुल्क समुचित चिकित्सा सेवा। वर्तमान में 1,094 एम्बुलेंस संचालित।
दूरदराज क्षेत्रों (रेगिस्तानी, आदिवासी, अविकसित गांव) में हर महीने 20 मुफ्त मेडिकल कैम्प। राज्य में 28 मोबाइल मेडिकल वाहन चल रहे हैं।
सरपंच/वार्डपंच अध्यक्षता में 43,440 समितियां गठित। सदस्य — आशा सहयोगिनी (संयोजक), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ANM, स्वयं सहायता समूह, महिला स्वास्थ्य संघ आदि।
शिशु व मातृ मृत्यु दर घटाने हेतु गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को निःशुल्क दवा, प्रयोगशाला जांच, भोजन, रक्त व यातायात सुविधा।
कमज़ोर वर्गों के स्वास्थ्य स्तर सुधार पर केंद्रित — संक्रामक रोग नियंत्रण के साथ-साथ उपचारात्मक व निवारक स्वास्थ्य सेवाएं।
औद्योगिक/वाणिज्यिक/निजी शैक्षणिक/निजी चिकित्सा संस्थानों में 10+ कर्मचारी व ₹21,000/माह तक वेतन वालों को चिकित्सा सुविधा — पति/पत्नी, आश्रित पुत्र (21 वर्ष तक), अविवाहित पुत्री, विकलांग बच्चे व आश्रित माता-पिता सहित। व्यय ESIC व राज्य सरकार के बीच 7:1 अनुपात में; नियोक्ता 3.25% + कर्मचारी 0.75% योगदान। 3 अस्पताल (जोधपुर, भीलवाड़ा, पाली — 50 शैय्या) + 76 औषधालय। 58 चिकित्सालयों में दंत सेवाएं।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशानुसार आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के सर्वांगीण विकास हेतु राजस्थान राज्य आयुष सोसायटी व राष्ट्रीय आयुष मिशन कार्यालय की स्थापना की गई। दो प्रकार की गतिविधियाँ: (i) आवश्यक गतिविधियाँ/घटक (आयुष सेवाएँ, शैक्षणिक संस्थान) (ii) फ्लेक्सी पूल के तहत गतिविधियाँ।