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🏺 राजस्थान प्राचीन इतिहास — Part 1

🏺 Ancient History of Rajasthan — Part 1

ऐतिहासिक काल • पाषाण काल • कालीबंगा • आहड़ • गिलूण्ड • अन्य प्रमुख पुरातात्विक स्थल Historical Eras • Stone Age • Kalibangan • Ahar • Gilund • Major Archaeological Sites
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राजस्थान का इतिहास — परिचय एवं स्रोतHistory of Rajasthan — Introduction & Sources
SOURCES
📅 ऐतिहासिक कालखंड का विभाजनDivision of Historical Eras
प्रागैतिहासिक कालPrehistoric Period
मानव इतिहास की कोई लिखित जानकारी नहीं मिलती। अध्ययन का एकमात्र स्रोत पुरातात्विक अवशेष (पाषाण उपकरण) हैं। No written records exist. Archaeological remains (stone tools) are the sole source of study.
आद्य-ऐतिहासिक कालProto-historic Period
लिखित साक्ष्य उपलब्ध हैं परंतु उन्हें अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है। उदाहरण: सिंधु / हड़प्पा सभ्यता तथा ताम्रपाषाणिक संस्कृतियाँ। Written records exist but remain undeciphered to date. Example: Indus / Harappan Civilization and Chalcolithic cultures.
ऐतिहासिक कालHistorical Period
लिखित साक्ष्य प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं तथा जिन्हें सफलता से पढ़ा व सत्यापित किया जा चुका है। (६ठी शताब्दी ई.पू. से)। Written evidence is abundant, deciphered, and historically verified (from 6th century BCE).
📚 प्रमुख साहित्यिक व शोध स्रोतKey Literary & Research Sources
वीर विनोद
by कविराजा श्यामलदास (Kaviraja Shyamaldas)
राजपूताने का इतिहास
by डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (Dr. G.H. Ojha)
Annals & Antiquities
by कर्नल जेम्स टॉड (Col. James Tod)
ऑरेल स्टेन (Aurel Stein)
1942 में "द ज्योग्राफिकल जर्नल" में घग्घर (वैदिक सरस्वती) नदी घाटी का पुरातात्विक सर्वेक्षण प्रकाशित किया। Published survey of Ghaggar (Vedic Saraswati) valley in "The Geographical Journal" (1942).
🔭 राजस्थान में पुरातात्विक सर्वेक्षण का इतिहासHistory of Archaeological Survey in Rajasthan
राजस्थान में पुरातात्विक सर्वेक्षण का कार्य सर्वप्रथम 1871 ई. में A.C.L. कार्लाइल (A.C.L. Carlleyle) ने प्रारंभ किया। इन्होंने दौसा व लावान से लघु पाषाण उपकरण (Microliths) खोजे। Archaeological survey work in Rajasthan was pioneered in 1871 by A.C.L. Carlleyle, discovering microliths from Dausa & Lawan.
बाद में योगदान देने वाले प्रमुख विद्वान: डी.आर. भंडारकर, दयाराम साहनी, एच.डी. सांकलिया, बी.बी. लाल, वी.एन. मिश्र, आर.सी. अग्रवाल आदि। Subsequent key archaeologists: D.R. Bhandarkar, Dayaram Sahni, H.D. Sankalia, B.B. Lal, V.N. Misra, R.C. Agrawala.
प्रागैतिहासिक शैलचित्र (Rock Paintings): अरावली व चम्बल घाटी (कोटा, रावतभाटा), बूंदी की छाजा नदी घाटी तथा विराटनगर (जयपुर) व हरसौरा (अलवर) से आखेट दृश्यों के शैलचित्र मिले हैं। Rock Paintings: Hunting scenes discovered at Chambal valley (Kota), Chhaja river valley (Bundi), Bairath (Jaipur), and Harsora (Alwar).
"राजपूताना" नाम सर्वप्रथम प्रयोग: जॉर्ज थॉमस (George Thomas) द्वारा 1800 ई. में। First usage of "Rajputana": By George Thomas in 1800 AD.
"राजस्थान / रायथान" नाम: कर्नल जेम्स टॉड (Col. James Tod) द्वारा 1829 ई. में लिखित ग्रंथ में। "Rajasthan / Raithan": Given by Col. James Tod in his 1829 publication.
सी.ए. हैक (C.A. Hacket, 1870): जयपुर और इंद्रगढ़ (बूंदी) से प्रथम पाषाणकालीन कुल्हाड़ी (Hand-axe) प्राप्त की। C.A. Hacket (1870): Discovered the first Paleolithic Hand-axe from Jaipur and Indargarh.
जनपद काल एवं पुरातात्विक अनुसंधानJanapada Period & Archaeological Explorations
1000 BCE – 300 CE
🗺️ राजस्थान के प्राचीन जनपदAncient Janapadas of Rajasthan
मत्स्य जनपद
राजधानी: विराटनगर (बैराठ) | जयपुर, अलवर, भरतपुर क्षेत्रCapital: Viratnagar (Bairath) | Jaipur, Alwar, Bharatpur
शिवि जनपद
राजधानी: मध्यमिका (नगरी) | चित्तौड़गढ़ व उदयपुर अंचलCapital: Madhyamika (Nagari) | Chittorgarh & Udaipur
सूरसेन जनपद
राजधानी: मथुरा | भरतपुर, धौलपुर, करौली क्षेत्रCapital: Mathura | Bharatpur, Dholpur, Karauli
मालव जनपद
राजधानी: नगर (टोंक) | टोंक, अजमेर व जयपुर ग्रामीणCapital: Nagar (Tonk) | Tonk, Ajmer, Jaipur rural
जांगल प्रदेश
राजधानी: अहिच्छत्रपुर (नागौर) | बीकानेर व जोधपुर क्षेत्रCapital: Ahichhatrapur (Nagaur) | Bikaner & Jodhpur
📌 प्रमुख पुरातात्विक अन्वेषण मील के पत्थरKey Archaeological Exploration Milestones
1908 ई. में सेटन-कार (Seton-Karr): झालावाड़ क्षेत्र से पुरापाषाण कालीन (Paleolithic) हैंड-एक्स व उपकरण खोजे। 1908 - Seton-Karr: Discovered Paleolithic hand-axes and stone tools in Jhalawar region.
बी. ऑलचिन (B. Allchin): जालोर क्षेत्र तथा पुष्कर के बालू टीलों से मध्यपाषाण युगीन उपकरण खोजे। B. Allchin: Unearthed Mesolithic tools from sand dunes of Jalor and Pushkar.
वी.एन. मिश्र (V.N. Misra) एवं डेक्कन कॉलेज पुणे: लूनी नदी घाटी व बनास संस्कृति के उत्खनन में सर्वप्रमुख योगदान। V.N. Misra & Deccan College Pune: Major role in excavating Luni Valley & Banas Culture.
राजस्थान पुरातत्व विभाग (R.C. अग्रवाल, विजय कुमार): गणेश्वर, सुनारी व नोहा में उत्खनन द्वारा नवीन दिशा दी। Rajasthan Arch. Dept. (R.C. Agrawala, Vijay Kumar): Pioneered excavations at Ganeshwar, Sunari & Noh.
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पाषाण काल — राजस्थानStone Age in Rajasthan
STONE AGE
🏔️ पुरापाषाण कालPaleolithic Era
समय (Period)
5,000,000 BCE – 10,000 BCE
मुख्य स्थल
डीडवाना व जायल (नागौर), भानगढ़ (अलवर), इंद्रगढ़ (कोटा), मोगरा (जोधपुर)Didwana & Jayal (Nagaur), Bhangarh, Indargarh, Mogra
जीवन शैली
आखेटक (शिकारी) व खाद्य संग्राहक; आग का ज्ञान परंतु कृषि से अनभिज्ञ।Hunters & food gatherers; Aware of fire, unaware of agriculture.
प्रमुख औजार
हैंड-एक्स (Hand-axe), क्लीवर (Cleaver), चॉपर (Chopper)
⛰️ मध्यपाषाण कालMesolithic Era
समय (Period)
10,000 BCE – 5,000 BCE (Microliths)
मुख्य स्थल
बागोर (भीलवाड़ा), तिलवाड़ा (बाड़मेर), विराटनगर, पुष्करBagor (Bhilwara), Tilwara (Barmer), Viratnagar, Pushkar
विशेषता
पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य (बागोर); सूक्ष्म पाषाण उपकरण (Microliths)।Earliest evidence of animal husbandry (Bagor); Microliths.
औजार
ब्लेड, पाइंट, स्क्रैपर, त्रिकोण, समलंब पाषाण
🌿 नवपाषाण कालNeolithic Era
समय (Period)
5,000 BCE से आगे (Neolithic Revolution)
मुख्य स्थल
आहड़, गिलूण्ड, कालीबंगा के निचली परतें, भरतपूर क्षेत्रAhar, Gilund, Lower strata of Kalibangan, Bharatpur
उपलब्धियाँ
कृषि का प्रारंभ, पहिये का आविष्कार, स्थायी बस्तियाँ, पॉलिशदार कुल्हाड़ी।Beginning of agriculture, invention of wheel, permanent settlements.
🥉 ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Period — 3000–1500 BCE)Chalcolithic Period (3000–1500 BCE)
प्रमुख स्थल
गणेश्वर (सीकर), आहड़ व बालाथल (उदयपुर), कालीबंगा (हनुमानगढ़), गिलूण्ड (राजसमंद), झाडोलGaneshwar, Ahar & Balathal, Kalibangan, Gilund, Jhadol
धातु ज्ञान
पत्थर के साथ-साथ शुद्ध तांबे (Copper) के उपकरणों का बहुतायत में प्रयोग।Use of pure copper tools alongside stone implements.
खाद्यान्न उत्पादक समाज, कृषि (गेहूँ, जौ, चावल) तथा विशिष्ट मृदभांड कला।Grain producing society, agriculture (wheat, barley, rice) and pottery art.
तांबे को गलाने तथा ढालने की स्वदेशी तकनीक का विकास।Development of indigenous copper smelting and casting techniques.
कच्ची व पक्की ईंटों के स्थायी मकानों में निवास।Settlements featuring houses made of mud and baked bricks.
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राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं — धातु वर्गीकरणAncient Civilizations of Rajasthan — Metal Classification
CIVILIZATIONS
📊 तीन धातु युगों के आधार पर वर्गीकरणClassification by Three Metal Ages
कांस्ययुगीन सभ्यताएँ (Bronze Age)Bronze Age Civilizations ताम्रयुगीन सभ्यताएँ (Copper Age)Copper Age Civilizations लौहयुगीन सभ्यताएँ (Iron Age)Iron Age Civilizations
कालीबंगा (हनुमानगढ़)
पीलीबंगा (हनुमानगढ़)
करणपुरा (हनुमानगढ़)
तरखानवाला डेरा (गंगानगर)
गणेश्वर (सीकर) — जननी
आहड़ & बालाथल (उदयपुर)
गिलूण्ड (राजसमंद)
कुराड़ा (नागौर) & सोथी (बीकानेर)
बैराठ (जयपुर)
रैंद & नगर (टोंक)
सुनारी (झुंझुनू) & नोह (भरतपुर)
ईसवाल (उदयपुर) & नगरी (चित्तौड़)
त्वरित याद रखने की सारणी (Quick Revision Trick)Quick Revision Reference Table
पुरापाषाण (Paleolithic)
→ डीडवाना व जायल (नागौर)
→ भानगढ़ (अलवर)
→ इंद्रगढ़ (कोटा)
मध्यपाषाण (Mesolithic)
→ बागोर (भीलवाड़ा)
→ तिलवाड़ा (बाड़मेर)
→ विराटनगर (जयपुर)
ताम्रपाषाण (Chalcolithic)
→ गणेश्वर (सीकर)
→ आहड़ व बालाथल (उदयपुर)
→ कालीबंगा (हनुमानगढ़)
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कालीबंगा सभ्यता (हनुमानगढ़)Kalibangan Civilization (Hanumangarh)
3000–1750 BCE
📍 सामान्य परिचय व उत्खननGeneral Introduction & Excavation
शाब्दिक अर्थ
काले रंग की चूड़ियाँ (Black Bangles)Black Bangles
भौगोलिक स्थिति
हनुमानगढ़ | प्राचीन सरस्वती / दृषद्वती (वर्तमान घग्घर) नदी तटHanumangarh | Ancient Saraswati (Ghaggar) river bank
प्रथम खोज (1952)
अमलानंद घोष (Amlanand Ghosh) द्वाराBy Amlanand Ghosh (1952)
विस्तृत उत्खनन
1961–1969: B.B. लाल, B.K. थापर व M.D. खरे द्वारा (5 स्तरों में)1961–1969: By B.B. Lal, B.K. Thapar & M.D. Khare
दशरथ शर्मा मत
डॉ. दशरथ शर्मा ने कालीबंगा को सिंधु साम्राज्य की "तीसरी राजधानी" कहा।Dr. Dasharatha Sharma called it the "3rd Capital" of Harappan Empire.
🏙️ प्रमुख पुरातात्विक साक्ष्य व विशेषताएँKey Archaeological Evidence & Features
विश्व में प्राक्-हड़प्पा कालीन जुते हुए खेत (Ploughed Field) के प्राचीनतम साक्ष्य — एक साथ दो फसलें (चना + सरसों)।World's oldest evidence of pre-Harappan ploughed field — double cropping (gram + mustard).
7 आयताकार अग्नि वेदियाँ (Fire Altars) — धार्मिक बलि व हवन परंपरा के प्रमाण।7 rectangular Fire Altars indicating ritual sacrifices and rituals.
भूकंप (Earthquake) के प्राचीनतम साक्ष्य — प्राक्-हड़प्पा स्तरों से दीवारों में दरारें।Earliest evidence of an Earthquake in world history from pre-Harappan walls.
लकड़ी की नाली (Wooden Drain): जल निकासी हेतु कास्ट (लकड़ी) व पक्की ईंटों की नालियाँ।Wooden Drains: Unique use of hollowed wooden logs for drainage.
अलंकृत ईंटें (Decorative Bricks): फर्श के निर्माण में अलंकृत ईंटों के प्रयोग का एकमात्र उदाहरण।Exclusive use of decorated/carved bricks in floor construction.
शल्य चिकित्सा (Trephination) साक्ष्य: बालक की खोपड़ी में 6 छिद्र तथा जलशीर्ष रोग का इलाज।Evidence of primitive brain surgery (child's skull with 6 trepanned holes).
स्वास्तिक चिह्न: बर्तनों पर स्वास्तिक का अंकन तथा मुहरों पर व्याघ्र युक्त महिला (मातृदेवी) आकृति।Swastika symbols on pottery and seals depicting tiger and female deity.
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आहड़ सभ्यता — बनास संस्कृति (उदयपुर)Ahar Civilization — Banas Culture (Udaipur)
2100–1500 BCE
📍 सामान्य परिचय व उत्खननGeneral Overview & Excavation
भौगोलिक स्थिति
उदयपुर | आयड़ / बेड़च नदी तट (बनास नदी की सहायक)Udaipur | Ayad / Bedach River bank
प्राचीन व स्थानीय नाम
प्राचीन: ताम्रवती नगरी | स्थानीय: धूलकोट (धूल का टीला) | 11वीं सदी: आघाटपुरAncient: Tamravati Nagari | Local: Dhulkot | 11th Cent: Aghatpur
प्रथम उत्खनन (1953)
अक्षयकीर्ति व्यास (A.K. Vyas) द्वारा प्रारंभInitiated by Akshay Kirti Vyas (1953)
द्वितीय चरण (1956)
आर.सी. अग्रवाल (R.C. Agrawala) के नेतृत्व मेंLed by R.C. Agrawala (1956)
सर्वाधिक उत्खनन (1961)
एच.डी. सांकलिया (H.D. Sankalia) (पुणे विश्वविद्यालय) द्वाराExtensive excavations by H.D. Sankalia (1961–62)
🏺 प्रमुख अवशेष व सांस्कृतिक लक्षणMajor Artifacts & Cultural Traits
ताँबा गलाने की भट्ठियाँ (Copper Smelting Furnaces): तांबे की कुल्हाड़ियाँ, गलाने की कुल्हाड़ियाँ व मुद्राएँ।Copper Smelting Furnaces: Axes, copper sheets, and smelting tools.
लाल-काले मृदभांड (Black & Red Ware - BRW): उल्टी पकाई शैली (Inverted Firing) द्वारा निर्मित बर्तन।Black & Red Ware (BRW): Manufactured via inverted firing technique.
गोरे व कोठ (Gore & Koth): अनाज भंडारण के विशाल मिट्टी के बर्तन।Gore & Koth: Large earthen jars used for grain storage.
बनासियन बुल (Banasian Bull): टेराकोटा (पकी मिट्टी) से निर्मित वृषभ (बैल) की आकृतियाँ।Banasian Bull: Terracotta bull figurines symbolizing Banas culture.
संयुक्त परिवार (Joint Family): मकानों में एक से अधिक (2 से 6) चूल्हे; एक चूल्हे पर मानव हथेली की छाप।Joint Family System: Houses containing multiple hearths (2 to 6).
यूनानी मुद्राएँ (Greek Coins): 6 तांबे की मुद्राएँ जिनमें एक पर 'अपोलो' देवता तथा तीर-तरकश अंकित।Greek Coins: 6 copper coins, one bearing God Apollo with bow & arrow.
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गिलूण्ड (राजसमंद) एवं बालाथल (उदयपुर)Gilund (Rajsamand) & Balathal (Udaipur)
AHAR EXTENSION
📍 गिलूण्ड सभ्यता (राजसमंद)Gilund Civilization (Rajsamand)
स्थिति व नदी
राजसमंद | बनास नदी के तट परRajsamand | On the banks of Banas River
उत्खननकर्ता
1957–58: B.B. लाल | 1998–2003: प्रो. वी.एस. शिंदे व प्रो. पॉशेल1957–58: B.B. Lal | 1998–2003: V.S. Shinde & Possehl
विशिष्ट लक्षण
आहड़ में जहाँ पक्की ईंटें नहीं मिलीं, वहीं गिलूण्ड में पक्की ईंटों का प्रचुर प्रयोग हुआ। चूने का प्लास्टर, मिट्टी के खिलौने, हाथीदांत की चूड़ियाँ।Unlike Ahar, Gilund shows extensive use of baked bricks. Lime plaster and ivory bangles found.
📍 बालाथल सभ्यता (उदयपुर)Balathal Civilization (Udaipur)
स्थिति व तहसील
उदयपुर | वल्लभनगर तहसील | बेड़च नदी घाटीUdaipur | Vallabhnagar tehsil | Bedach valley
उत्खनन (1993)
प्रो. वी.एन. मिश्र (V.N. Misra) के नेतृत्व मेंUnder leadership of Prof. V.N. Misra
मुख्य साक्ष्य
11 कमरों वाला विशाल भवन / दुर्गनुमा संरचना; हाथ से बुना हुआ सूती कपड़ा; लोहे गलाने की 5 भट्ठियाँ (मौर्योत्तर/शुंग काल)।11-room complex / Fortified structure; Hand-woven cotton cloth; 5 iron smelting furnaces.
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राजस्थान के अन्य प्रमुख पुरातात्विक स्थलOther Major Archaeological Sites of Rajasthan
KEY SITES
बैराठ / विराटनगर (जयपुर)
📍 कोटपूतली-बहरोड़ / जयपुर | बाणगंगा नदी
उत्खनन: दयाराम साहनी (1936), नीलसरत्न बनर्जी व कैलाशनाथ दीक्षित (1962)।
भाब्रू शिलालेख (1837): कैप्टन बर्ट द्वारा बीजक की पहाड़ी से खोजा गया (अशोक का बौद्ध त्रि-रत्न विश्वास)।
बौद्ध गोल मंदिर व स्तूप: भारत में मौर्यकालीन गोल मंदिर के प्राचीनतम अवशेष।
मुद्राएँ: 36 आहत/पंचमार्क सिक्के तथा 16 इंडो-ग्रीक राजा मिनेण्डर की मुद्राएँ मटके में मिलीं।
गणेश्वर (सीकर / नीमकाथाना)
📍 नीमकाथाना | काँतली नदी तट | 2800 BCE
उपाधि: "भारत में ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी" एवं ताम्रसंचयी संस्कृति।
उत्खनन: रतनचंद्र अग्रवाल (R.C. Agrawala - 1977) एवं विजय कुमार।
विशेष साक्ष्य: 99% शुद्ध तांबे के 2000+ उपकरण (मछली पकड़ने का काँटा, बाणाग्र, कुल्हाड़ी)।
पत्थर के बाँध: बाढ़ से सुरक्षा हेतु पत्थरों के बाँध बनाने के एकमात्र साक्ष्य। हड़प्पा को ताँबा आपूर्ति।
रैंद (टोंक)
📍 टोंक | ढील नदी तट | लौहयुगीन
उपाधि: "प्राचीन भारत का टाटा नगर" (विशाल लौह सामग्री व सिक्कों हेतु)।
उत्खनन: डॉ. के.एन. पुरी (K.N. Puri) द्वारा 1938-40 में।
सिक्के: 3075 पंचमार्क (आहत) सिक्के, मालव जनपद के सिक्के तथा यूनानी शासक अपोलोवोट्स का सिक्का।
रंगमहल (हनुमानगढ़)
📍 हनुमानगढ़ | घग्घर नदी | कुषाणकालीन
उत्खनन: स्वीडिश दल का नेतृत्व श्रीमती हन्नारिड (Hanna Rydh) द्वारा (1952–54)।
साक्ष्य: कनिष्क प्रथम व कनिष्क तृतीय की कुषाणकालीन 105 तांबे की मुद्राएँ।
मृण्मूर्तियाँ: गंधार शैली से प्रभावित गुरु-शिष्य की प्रसिद्ध मिट्टी की मूर्ति।
नगर / कर्कोट नगर (टोंक)
📍 टोंक | मालव जनपद की राजधानी
उत्खनन: के.वी. सौंदर्यराजन एवं कृष्णदेव।
साक्ष्य: मालव गणराज्य के 6000+ अति-सूक्ष्म तांबे के सिक्के ('मालवानां जयः' अंकित)।
मृण्मूर्तियाँ: महिषासुरमर्दिनी, कामदेव, गणेश व लक्ष्मी की गुप्तकालीन मूर्तियाँ।
बागौर (भीलवाड़ा)
📍 भीलवाड़ा | कोठारी नदी तट | 5000–2000 BCE
उत्खनन: डॉ. वी.एन. मिश्र एवं डॉ. एल.एस. लेश्निक (1967–70)।
महत्व: भारत में कृषि एवं पशुपालन के सबसे प्राचीनतम साक्ष्य। महासत्तियों का टीला।
लघु पाषाण उपकरण: सर्वाधिक प्रकार के सूक्ष्म पाषाण औजार (Microliths) प्राप्त।
सुनारी (झुंझुनू)
📍 झुंझुनू | काँतली नदी तट | लौहयुगीन
उत्खनन: राजस्थान पुरातत्व विभाग द्वारा (1980–81)।
महत्व: भारत में लोहा गलाने की प्राचीनतम धमन भट्ठियाँ (Blast Furnaces) प्राप्त।
अवशेष: लोहे के तीर, भाले तथा धान साफ करने के कोठे व मातृदेवी मूर्तियाँ।
ईसवाल (उदयपुर)
📍 उदयपुर | प्राचीन औद्योगिक नगर
उत्खनन: राजस्थान विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा।
विशेषता: 2000 वर्षों तक निरंतर लोहा गलाने के पुरातात्विक प्रमाण।
काल: 5वीं शताब्दी ई.पू. (प्राचीन औद्योगिक बस्ती व समृद्ध जनजीवन)।
नोह (भरतपुर)
📍 भरतपुर | रूपारेल नदी तट | लौहयुगीन
उत्खनन: आर.सी. अग्रवाल द्वारा (1963–64)। 5 सांस्कृतिक स्तर।
साक्ष्य: "जाखबाबा" (यक्ष) की विशाल काय प्रतिमा; चित्रित धूसर मृदभांड (PGW)।
कृषि साक्ष्य: लोहे के कृषि उपकरण व हल के फाल; चावल की खेती के प्रमाण।
ओझियाना (भीलवाड़ा)
📍 भीलवाड़ा | बनास संस्कृति | पहाड़ी पर स्थित
उत्खनन: बी.आर. मीणा व आलोक त्रिपाठी द्वारा (2000 AD)।
ओझियाना बुल: सफेद रंग से चित्रित मिट्टी के वृषभ (White Painted Terracotta Bulls)।
विशिष्टता: बनास संस्कृति का एकमात्र स्थल जो पहाड़ी ढलान पर स्थित है।
भीनमाल (जालोर)
📍 जालोर | प्राचीन श्रीमाल / पि-लो-मो-लो
उत्खनन: आर.सी. अग्रवाल (1953–54)।
विदेशी व्यापार साक्ष्य: यूनानी दुहत्थी सुराही (Amphora) तथा रोमन एम्फोरा जार के टुकड़े।
ऐतिहासिक संदर्भ: कवि माघ एवं महान गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त की कर्मभूमि।
जोधपुरा (जयपुर)
📍 कोटपूतली-बहरोड़ / जयपुर | साबी नदी तट
उत्खनन: आर.सी. अग्रवाल व विजय कुमार (1972–75)।
साक्ष्य: कपिशवर्णी मृदपात्र (OCP); लोहा गलाने की भट्ठियाँ व तीरों के अग्रभाग।
विशेष: डिस्क आकार के मनके व मौर्यकालीन लोहे के अस्त्र-शस्त्र।
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पूर्व मध्यकाल — राजपूत उत्पत्ति व पृष्ठभूमिEarly Medieval Period — Rajput Origin & Background
RAJPUT ERA
👑 राजपूतों का अभ्युदयEmergence of Rajputs
हर्षवर्धन की मृत्यु (647 AD) के पश्चात उत्तर भारत में केंद्रीय सत्ता के अभाव में अनेक राजवंश 'राजपूतों' के रूप में उदित हुए। Post Harsha (647 AD), decentralized regional powers emerged leading to the rise of Rajput dynasties.
राजस्थान के प्रमुख राजवंश: गुहिल (मेवाड़), गुर्जर-प्रतिहार (भीनमाल/मंडोर), चौहान (सांभर/अजमेर), परमार (आबू/मालवा), राठौड़ (मारवाड़) Key Rajasthan dynasties: Guhilas, Gurjara-Pratiharas, Chauhans, Parmaras, Rathores.
मध्यकालीन राजपूत व्यवस्था: सामंतवादी व्यवस्था (Feudalism) पर आधारित, जिसमें मातृभूमि रक्षा व शौर्य सर्वोपरि था। Medieval Rajput order: Based on Feudalism, emphasizing chivalry and territorial defense.
📅 प्रमुख ऐतिहासिक नामकरण पुनः स्मरणHistorical Nomenclature Summary
"राजपूताना" — जॉर्ज थॉमस (1800 ई.) [लिखित साक्ष्य: विलियम फ्रेंकलिन 1805]।"Rajputana" — George Thomas (1800 AD).
"राजस्थान / रजवाड़ा" — कर्नल जेम्स टॉड (1829 ई.)।"Rajasthan / Rajwara" — Col. James Tod (1829 AD).
प्रथम पुरापाषाण उपकरण (1870): सी.ए. हैक द्वारा जयपुर व इंद्रगढ़ से।First Paleolithic Tool (1870): C.A. Hacket from Jaipur & Indargarh.
प्रथम सर्वेक्षक (1871): ए.सी.एल. कार्लाइल द्वारा दौसा से लघु पाषाण उपकरण।First Archaeologist (1871): A.C.L. Carlleyle from Dausa.
→ Part 2 देखें — 100 MCQ (Quiz Engine & Scorecard) →→ Proceed to Part 2 — 100 MCQs (Quiz Engine) →
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