RAS A2Z
RAS A2Z
RAS Pre 2026 इकाई 1 · भाग B Master Research Edition

🏰 मेवाड़ का इतिहास: गुहिल एवं सिसोदिया राजवंश

गुहिल से सिसोदिया तक — सभी शासक, युद्ध, स्थापत्य, साहित्य, प्रशासन एवं संस्कृति | Complete History of Mewar — Guhil & Sisodia Dynasty | RAS A2Z

📖 RPSC पाठ्यक्रम मैपिंग (09-01-2026): राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परंपरा एवं विरासत (इकाई 1: भाग B - प्राचीन एवं मध्यकालीन राजस्थान के प्रमुख राजवंश एवं उनकी प्रशासनिक व राजस्व व्यवस्था)
PYQ पैटर्न: 2013, 2016, 2018, 2021, 2023, 2024 में सतत एवं गहन प्रश्न। संभावित स्वरूप: युद्धों का कालक्रम, सांस्कृतिक/स्थापत्य उपलब्धियां, ग्रंथ-लेखक सुमेलन, प्रशासनिक शब्दावली, शासक-उपाधि सुमेलन।

1 परिचय / Introduction

मेवाड़ का गुहिल/सिसोदिया राजवंश विश्व का सबसे लंबे समय तक एक ही क्षेत्र पर शासन करने वाला राजवंश माना जाता है। इसकी दो प्रमुख शाखाएं रहीं: रावल शाखा (गुहिल से रत्नसिंह तक, 1303 ई.) तथा राणा/सिसोदिया शाखा (हम्मीर से भूपालसिंह तक)। मेवाड़ का इतिहास विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध सतत संघर्ष, स्वाभिमान, सांस्कृतिक संरक्षण एवं स्थापत्य कला के अभूतपूर्व विकास का प्रतीक है। [PDF p.1]

पाठ्यक्रम खंड: राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परंपरा एवं विरासत (इकाई 1: भाग B - प्राचीन एवं मध्यकालीन राजस्थान के प्रमुख राजवंश एवं उनकी प्रशासनिक व राजस्व व्यवस्था)

The Guhil/Sisodia dynasty of Mewar is considered the longest ruling dynasty in the world to have ruled over the same territory. It had two major branches: the Rawal branch (from Guhil to Ratnasinh, 1303 AD) and the Rana/Sisodia branch (from Hammir to Bhupalsinh). The history of Mewar symbolizes continuous struggle against foreign invaders, self-respect, cultural preservation, and unprecedented development of architecture. [PDF p.1]

Syllabus Section: History, Art, Culture, Literature, Tradition & Heritage of Rajasthan (Unit 1: Part B - Major Dynasties of Ancient & Medieval Rajasthan and their Administrative & Revenue Systems)

2 परिभाषा / Definition

मेवाड़ साम्राज्य (Mewar Dynasty): पौराणिक सूर्यवंश की परंपरा से संबद्ध वह राज्य जिसका भौगोलिक विस्तार मुख्यतः मेदपाट/प्रावाट क्षेत्र (आधुनिक उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा व प्रतापगढ़) में था। मेवाड़ के शासक स्वयं को 'एकलिंगजी (शिव)' का दीवान तथा राज्य का वास्तविक शासक भगवान एकलिंगजी को मानते थे। [PDF p.1]

⭐ Expert Noteदीवान परंपरा: मेवाड़ के महाराणा एकलिंगजी को वास्तविक शासक मानते थे तथा स्वयं को उनका 'दीवान' (प्रतिनिधि) मानकर शासन चलाते थे। राज्य से बाहर जाते समय दीवान 'आसका (अनुमति)' लेते थे। [PDF p.7]

Mewar Dynasty: A kingdom associated with the mythological Solar Dynasty (Suryavansh), whose geographical extent was mainly in the Medapata/Paravata region (modern Udaipur, Rajsamand, Chittorgarh, Bhilwara, and Pratapgarh). The rulers of Mewar considered themselves the 'Diwan' (minister) of Eklingji (Shiva) and regarded Lord Eklingji as the actual ruler of the state. [PDF p.1]

⭐ Expert NoteDiwan Tradition: The Maharanas of Mewar considered Eklingji as the real ruler and themselves as his 'Diwan' (representative). When leaving the state, the Diwan would seek 'Asaka' (permission). [PDF p.7]

3 वंशावली एवं राजधानियाँ / Lineage & Capitals

📌 वंशावली क्रम

[गुहादित्य / गुहिल (566 ई.) — गुहिल वंश संस्थापक] │ [बप्पा रावल / कालभोज (734-753 ई.) — वास्तविक संस्थापक] │ [रावल शाखा] (566 ई. - 1303 ई.) │ ├── अल्लट (10वीं सदी) — आहड राजधानी ├── जैत्रसिंह (1213-1253) — चित्तौड़ राजधानी └── रत्नसिंह (1302-1303) — प्रथम साका, शाखा समाप्त │ [सिसोदिया / राणा शाखा] (1326 ई. - 1948 ई.) │ ├── राणा हम्मीर (1326-1364) — सिसोदा ग्राम, 'विषम घाटी पंचानन' ├── राणा लाखा (1382-1421) — जावर चांदी की खान ├── महाराणा कुंभा (1433-1468) — स्थापत्य का स्वर्णकाल ├── महाराणा सांगा (1509-1528) — 'हिंदूपत' ├── महाराणा उदयसिंह (1537-1572) — उदयपुर की स्थापना (1559) ├── महाराणा प्रताप (1572-1597) — स्वाभिमान के प्रतीक ├── महाराणा अमरसिंह प्रथम (1597-1620) — 1615 की संधि └── महाराणा भूपालसिंह (1930-1948) — अंतिम शासक, राजस्थान के प्रथम महाराज प्रमुख

📌 राजधानियों का क्रम

[रावल शाखा] [राणा / सिसोदिया शाखा] 1. नागदा (बप्पा रावल) 1. चित्तौड़गढ़ (राणा हम्मीर) 2. आहड (अल्लट) 2. कुंभलगढ़ (संकटकालीन) 3. चित्तौड़गढ़ (जैत्रसिंह) 3. उदयपुर (उदयसिंह, 1559) 4. चावंड (महाराणा प्रताप, 1585)
⭐ Expert Noteचावंड महाराणा प्रताप के समय 1585 से 1597 (12 वर्ष) तक राजधानी रहा, परंतु कुल मिलाकर चावंड 1585 से 1615 (30 वर्ष / अमरसिंह प्रथम के समय तक) मेवाड़ की राजधानी रहा। [PDF p.16]

📌 Lineage Sequence

[Guhaditya / Guhil (566 AD) — Founder of Guhil Dynasty] │ [Bappa Rawal / Kalabhoj (734-753 AD) — Actual Founder] │ [Rawal Branch] (566 AD - 1303 AD) │ ├── Allat (10th century) — Ahar capital ├── Jaitrasinh (1213-1253) — Chittor capital └── Ratnasinh (1302-1303) — First Saka, branch ended │ [Sisodia / Rana Branch] (1326 AD - 1948 AD) │ ├── Rana Hammir (1326-1364) — Sisoda village, 'Visham Ghati Panchanan' ├── Rana Lakha (1382-1421) — Jawar silver mines ├── Maharana Kumbha (1433-1468) — Golden age of architecture ├── Maharana Sanga (1509-1528) — 'Hindupat' ├── Maharana Udai Singh (1537-1572) — Founded Udaipur (1559) ├── Maharana Pratap (1572-1597) — Symbol of self-respect ├── Maharana Amar Singh I (1597-1620) — Treaty of 1615 └── Maharana Bhupal Singh (1930-1948) — Last ruler, first Maharaj Pramukh of Rajasthan

📌 Sequence of Capitals

[Rawal Branch] [Rana / Sisodia Branch] 1. Nagda (Bappa Rawal) 1. Chittorgarh (Rana Hammir) 2. Ahar (Allat) 2. Kumbhalgarh (Crisis capital) 3. Chittorgarh (Jaitrasinh) 3. Udaipur (Udai Singh, 1559) 4. Chavand (Maharana Pratap, 1585)
⭐ Expert NoteChavand remained the capital during Maharana Pratap's time from 1585 to 1597 (12 years), but overall Chavand remained the capital of Mewar from 1585 to 1615 (30 years / until Amar Singh I's time). [PDF p.16]

4 मेवाड़ के सभी शासक / All Rulers of Mewar

क्र.सं. शासक (Ruler) शासनकाल (Reign) मुख्य घटनाएं / उपलब्धियां (Key Events / Achievements)
1गृहादित्य (गुहिल)566 ई. सेगुहिल वंश के संस्थापक। [PDF p.1, p.7]
2बप्पा रावल (कालभोज)734-753 ई.वास्तविक संस्थापक। 'हिन्दुआ सूरज', 'राजगुरु', 'चकवे'। नागदा राजधानी, एकलिंगजी मंदिर, 115 ग्रेन स्वर्ण सिक्का। [PDF p.1, p.5]
3अल्लट (आलू रावल)10वीं सदीआहड को द्वितीय राजधानी बनाया। मेवाड़ में प्रथम नौकरशाही। हण राजकुमारी हरियादेवी से विवाह। [PDF p.1, p.5]
4जैत्रसिंह1213-1253 ई.भूताला का युद्ध (1227) में इल्तुतमिश को पराजित किया। चित्तौड़गढ़ को राजधानी बनाया। 'मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल' (दशरथ शर्मा)। [PDF p.1, p.5]
5तेजसिंह1253-1273 ई.बलबन के आक्रमण को विफल किया। प्रथम चित्रित ताड़पत्र ग्रंथ 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' (1260 ई., चित्रकार: कमलचंद्र)। [PDF p.8, p.14]
6समरसिंह1273-1302 ई.गुजरात अभियान हेतु जाते समय अलाउद्दीन खिलजी से कर वसूला। आबू शिलालेख 'शत्रुओं का संहारक'।
7रावल रत्नसिंह1302-1303 ई.चित्तौड़ का प्रथम साका (1303)। रानी पद्मिनी का जौहर, गोरा-बादल का बलिदान। रावल शाखा का अंत। [PDF p.1, p.7]
8राणा हम्मीर1326-1364 ई.सिसोदिया राजवंश की नींव (सिसोदा ग्राम)। 'विषम घाटी पंचानन', 'वीर राजा'। सिंगोली युद्ध (1336) में मोहम्मद बिन तुगलक को पराजित किया। [PDF p.1, p.5]
9क्षेत्रसिंह (खेत)1364-1382 ई.मालवा के दिलावर खां को हराया।
10राणा लाखा (लक्षसिंह)1382-1421 ई.जावर में चांदी की खान निकली; पिछोला झील निर्माण। पुत्र कुंवर चूड़ा को 'मेवाड़ का भीष्म पितामह' कहा। [PDF p.8]
11राणा मोकल1421-1433 ई.सम्मीधेश्वर मंदिर जीर्णोद्धार; एकलिंगजी का परकोटा।
12महाराणा कुंभा1433-1468 ई.स्थापत्य एवं संस्कृति का स्वर्णकाल32 दुर्ग (कुंभलगढ़, बसंती, मचान, भोमट, अचलगढ़); विजय स्तंभ (1440-48); संगीत राज (5 कोश)। उपाधियां: 'अभिनव भरताचार्य', 'हिन्दू सुल्तान', 'छाप गुरु', 'हाल गुरु'। [PDF p.2, p.5]
13उदा (उदयकरण)1468-1473 ई.पितृहंता; सामंतों ने गद्दी से हटाया; बिजली गिरने से मृत्यु।
14राणा रायमल1473-1509 ई.चित्तौड़ में अद्भुत जी (शिव) मंदिर निर्माण।
15महाराणा सांगा1509-1528 ई.'हिंदूपत', पाती पेरवेण प्रथा। खातोली (1517), गागरोन (1519), बयाना (1527), खानवा (1527) युद्ध। 80 घाव। कर्नल टॉड: "सैनिकों का भग्नावशेष"। [PDF p.2, p.5]
16रत्नसिंह द्वितीय1528-1531 ई.बूंदी के सूरजमल के साथ अहेरिया उत्सव में आपसी संघर्ष में मृत्यु।
17विक्रमादित्य1531-1536 ई.चित्तौड़ का द्वितीय साका (1535)। दासी पुत्र बनवीर द्वारा हत्या। [PDF p.5]
18बनवीर1536-1540 ई.अवैध शासक। पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर उदयसिंह को बचाया। [PDF p.8]
19महाराणा उदयसिंह1537-1572 ई.उदयपुर की स्थापना (1559), उदयसागर झील। चित्तौड़ का तृतीय साका (1568) — जयमल-पत्ता का बलिदान। [PDF p.2, p.5]
20महाराणा प्रताप1572-1597 ई.स्वाभिमान के प्रतीकहल्दीघाटी (1576), दिवेर (1582) — 'मेवाड़ का मैराथन'। चावंड राजधानी (1585)। चावंड चित्रशैली का प्रारंभ। उपाधियां: 'केसरी', 'पाथल', 'मेवाड़ की आंख'। [PDF p.2, p.5]
21महाराणा अमरसिंह प्रथम1597-1620 ई.प्रथम मुगल-मेवाड़ संधि (5 फरवरी 1615)। चावंड चित्रशैली का स्वर्णकाल (चित्रकार: निशारदीन)। [PDF p.5]
22महाराणा करणसिंह1620-1628 ई.जगमंदिर महलों का निर्माण प्रारंभ; शहजादा खुर्रम (शाहजहां) को शरण दी।
23महाराणा जगतसिंह प्रथम1628-1652 ई.उदयपुर का जगदीश (जगन्नाथ) मंदिर; रूपसागर। [PDF p.5]
24महाराणा राजसिंह1652-1680 ई.औरंगजेब के जजिया कर (1679) का विरोधराजसमंद झील (1662-76), राजप्रशस्ति (25 सर्ग, रणछोड़ भट्ट तैलंग)। उपाधियां: 'विजयकातकातू', 'हाइड्रोलिक रुलर'। [PDF p.3, p.5]
25महाराणा जयसिंह1680-1698 ई.जयसमंद झील (ढेबर झील) निर्माण (1685-1691)।
26महाराणा अमरसिंह द्वितीय1698-1710 ई.देबारी समझौता (1708) — मारवाड़ के अजीत सिंह व आमेर के सवाई जयसिंह की सहायता।
27महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय1710-1734 ई.'सहेलियों की बाड़ी' (उदयपुर), सीसारमा में वैद्यनाथ मंदिर।
28महाराणा जगतसिंह द्वितीय1734-1751 ई.हूरडा सम्मेलन (1734) की अध्यक्षता — मराठों के विरुद्ध राजपूत राजाओं को एकत्र करने का प्रयास। जगनिवास महल (Lake Palace) निर्माण। [PDF p.5]
29प्रताप सिंह द्वितीय / राजसिंह द्वितीय / अरिसिंह1751-1773 ई.मराठा हस्तक्षेप व आंतरिक असंतोष का काल।
30महाराणा हम्मीर द्वितीय1773-1778 ई.अल्पव्यस्क शासन, मराठा सिंधिया का प्रभाव बढ़ा।
31महाराणा भीमसिंह1778-1828 ई.कृष्णा कुमारी विवाद (गांगोली युद्ध - 1807)। ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि (13 जनवरी 1818) — मेवाड़ ब्रिटिश संरक्षण में चला गया। [PDF p.5]
32महाराणा सरदार सिंह1828-1842 ई.मेवाड़ भील कोर (MBC) की स्थापना (1841), मुख्यालय: खेरवाड़ा (उदयपुर)। [PDF p.5]
33महाराणा स्वरूप सिंह1842-1861 ई.1857 की क्रांति में अंग्रेजों की सहायता; 1861 में मेवाड़ में सती प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध।
34महाराणा शंभू सिंह1861-1874 ई.मेवाड़ में प्रथम आधुनिक लीगल कोड व शंभूरन्न पाठशाला।
35महाराणा सज्जन सिंह1874-1884 ई.सज्जनगढ़ दुर्ग (मानसून पैलेस); वीर विनोद के रचयिता कविराज श्यामलदास को संरक्षण; 'देश हितेषणी सभा' (1877)। [PDF p.14]
36महाराणा फतेह सिंह1884-1930 ई.1903 दिल्ली दरबार में जाने से रुके (केसरी सिंह बारहठ कृत 'चेतावनी रा चूंगट्या')। फतेहसागर झील निर्माण। [PDF p.5]
37महाराणा भूपाल सिंह1930-1948 ई.राजस्थान एकीकरण के समय मेवाड़ के अंतिम महाराणा; राजस्थान के प्रथम एवं एकमात्र 'महाराज प्रमुख'[PDF p.5]

5 मेवाड़ के प्रमुख युद्ध / Major Battles of Mewar

युद्ध का नाम वर्ष/तिथि मेवाड़ शासक विपक्षी परिणाम / विशेष तथ्य
चित्तौड़ विजय युद्ध 734 ई. बप्पा रावल मानमोरी (मौर्य शासक) बप्पा रावल ने चित्तौड़ पर अधिकार किया; नागदा को प्रथम राजधानी बनाया। [PDF p.17]
भूताला का युद्ध 1227 ई. जैत्रसिंह इल्तुतमिश (दिल्ली सल्तनत) जैत्रसिंह की विजय। नागदा नष्ट होने के कारण चित्तौड़गढ़ को राजधानी बनाया। वर्णन: जयसिंह सूरी कृत 'हम्मीर मद मर्दन'। [PDF p.5, p.17]
चित्तौड़ का प्रथम साका 1303 ई. रावल रत्नसिंह अलाउद्दीन खिलजी रत्नसिंह वीरगति, रानी पद्मिनी का जौहर। अलाउद्दीन ने चित्तौड़ का नाम 'खिज़ाबाद' रखा। रावल शाखा का अंत। [PDF p.1, p.5]
सिंगोली का युद्ध 1336 ई. राणा हम्मीर मोहम्मद बिन तुगलक हम्मीर की विजय, तुगलक को बंदी बनाया। सिसोदिया शाखा का सुदृढीकरण। [PDF p.18]
सारंगपुर का युद्ध 1437 ई. महाराणा कुंभा महमूद खिलजी प्रथम (मालवा) कुंभा की प्रचंड विजय; महमूद खिलजी को 6 माह बंदी बनाकर रखा। इसी विजय के उपलक्ष्य में विजय स्तंभ का निर्माण। [PDF p.2, p.5]
मंडलगढ़ व बनास के युद्ध 1443-1456 ई. महाराणा कुंभा महमूद खिलजी प्रथम कुंभा ने दक्षिणी राजपूताना पर वर्चस्व बनाए रखा; सभी आक्रमण निष्फल।
खातोली का युद्ध 1517 ई. महाराणा सांगा इब्राहिम लोदी (दिल्ली) सांगा की विजय। युद्ध में सांगा का एक हाथ व एक पैर क्षतिग्रस्त हुआ। [PDF p.2, p.5]
बाड़ी का युद्ध 1518 ई. महाराणा सांगा मियां माखन एवं मियां हसैन (लोदी) सांगा की एकतरफा विजय। उत्तर भारत में सांगा की साख चरम पर पहुंची। [PDF p.8]
गागरोन का युद्ध 1519 ई. महाराणा सांगा महमूद खिलजी द्वितीय (मालवा) सांगा की विजय; खिलजी को बंदी बनाया गया। [PDF p.2, p.5]
बयाना का युद्ध 16 फरवरी 1527 महाराणा सांगा बाबर की अग्रिम सेना सांगा की भीषण विजय; बाबर की सेना का मनोबल टूट गया। [PDF p.5]
खानवा का युद्ध 17 मार्च 1527 महाराणा सांगा बाबर बाबर की विजय ('जिहाद' का नारा, तोपखाने, तुलुगमा पद्धति)। सांगा घायल हुए। मुगल साम्राज्य की नींव मजबूत हुई। [PDF p.2, p.5]
चित्तौड़ का द्वितीय साका 1535 ई. विक्रमादित्य / रानी कर्मावती बहादुरशाह (गुजरात) रावत बाघसिंह (देवलिया) का केसरिया; रानी कर्मावती का जौहर। हुमायूं समय पर नहीं पहुंचा। [PDF p.5]
मावली का युद्ध 1540 ई. महाराणा उदयसिंह बनवीर (दासी पुत्र) बनवीर की पराजय व मृत्यु; उदयसिंह का चित्तौड़ पर पूर्ण अधिकार। [PDF p.21]
चित्तौड़ का तृतीय साका 1567-1568 ई. उदयसिंह / जयमल-पत्ता अकबर जयमल राठौड़ व पत्ता सिसोदिया का अभूतपूर्व बलिदान; फूलकंवर का जौहर। अकबर ने 30,000 आम नागरिकों का कल्लेआम किया। [PDF p.5]
हल्दीघाटी का युद्ध 18/21 जून 1576 महाराणा प्रताप मानसिंह प्रथम एवं आसफ खां अनिर्णायक / प्रताप की नैतिक व सामरिक विजय। अकबर का प्रताप को बंदी बनाने का उद्देश्य विफल रहा। [PDF p.2, p.5]
दिवेर का युद्ध अक्टूबर 1582 महाराणा प्रताप सुल्तान खान (मुगल सूबेदार) प्रताप की प्रचंड विजय। कर्नल टॉड ने इसे "मेवाड़ का मैराथन" कहा। मेवाड़ पुनरुद्धार की शुरुआत। [PDF p.2, p.5]
ऊंटाला का युद्ध 1600 ई. शक्तावत vs चंडावत आपसी संघर्ष 'हरावल' (सेना के अग्रिम दस्ते) में रहने के विशेषाधिकार की होड़। चंडावतों का हरावल अधिकार बरकरार रहा। [PDF p.22]
गांगोली का युद्ध 1807 ई. महाराणा भीमसिंह जयपुर vs मारवाड़ कृष्णा कुमारी विवाद — अमीर खां पिंडारी के दबाव में कृष्णा कुमारी को विष देकर विवाद समाप्त। [PDF p.5]
⭐ Expert Note — Battle Date Clarification
  • खानवा युद्ध: NCERT/प्रामाणिक इतिहास — 17 मार्च 1527; कविराज श्यामलदास (वीर विनोद) — 16 मार्च 1527। [PDF p.16]
  • हल्दीघाटी युद्ध: 18 जून 1576 (गोपीनाथ शर्मा के अनुसार 21 जून 1576)। [PDF p.5]

6 चित्तौड़ के तीन साके / The Three Sakas of Chittorgarh

क्रम वर्ष शासक आक्रमणकारी केसरिया (योद्धा) जौहर (नेतृत्व) विशेष तथ्य
प्रथम 1303 ई. रावल रत्नसिंह अलाउद्दीन खिलजी रत्नसिंह, गोरा, बादल रानी पद्मिनी (1600 महिलाएं) खिलजी ने चित्तौड़ का नाम 'खिज़ाबाद' रखा। रावल शाखा का अंत। [PDF p.1, p.5]
द्वितीय 1535 ई. विक्रमादित्य बहादुरशाह (गुजरात) रावत बाघसिंह (देवलिया) रानी कर्मावती हुमायूं सहायता के लिए समय पर नहीं पहुंचा; रानी कर्मावती ने हुमायूं को राखी भेजी थी। [PDF p.5]
तृतीय 1567-68 ई. उदयसिंह अकबर जयमल राठौड़ एवं पत्ता सिसोदिया फूलकंवर (पत्ता की पत्नी) अकबर ने जयमल-पत्ता की वीरता से प्रभावित होकर आगरा किले के द्वार पर इनकी मूर्तियां लगवाईं। [PDF p.5]
📌 Memory Trick — तीन साके (वर्ष एवं शासक)
"1303 में रत्न, 1535 में विक्रम, 1568 में उदय"
  • 1303 — रावल रत्नसिंह
  • 1535 — विक्रमादित्य / रानी कर्मावती
  • 1568 — उदयसिंह / जयमल-पत्ता

7 स्थापत्य, साहित्य एवं कला / Architecture, Literature & Art

📌 महाराणा कुंभा की स्थापत्य एवं साहित्यिक कृतियां

⭐ स्थापत्य का स्वर्णकाल
  • विजय स्तंभ (Victory Tower): 1440-1448 ई., 9 मंजिला, 122 फीट ऊंचा, 157 सीढ़ियां। शिल्पकार: जैता व उसके पुत्र पोमा, नापा, पूंजा। प्रशस्ति: अत्रि एवं महेश द्वारा रचित 'कीर्ति स्तंभ प्रशस्ति'। राजस्थान पुलिस व RBSE का प्रतीक चिह्न[PDF p.2, p.5]
  • कुंभलगढ़ दुर्ग: 36 किमी की दीवार, मुख्य वास्तुकार मंडन[PDF p.2]
  • 32 दुर्ग: कुंभलगढ़, बसंती, मचान, भोमट, अचलगढ़ आदि। [PDF p.2, p.5]
  • कुंभस्वामी मंदिर (चित्तौड़/कुंभलगढ़)।
📚 साहित्यिक कृतियां
  • संगीत राज: 5 कोशों में विभक्त — पाठ्य, गीत, वाद्य, नृत्य, रस रत्नकोश। [PDF p.3, p.5]
  • संगीत मीमांसा, संगीत क्रम दीपिका, सूड प्रबंध।
  • रसिक प्रिया: जयदेव की 'गीत गोविंद' पर टीका।
  • चंडी शतक: बाणभट्ट की रचना पर टीका।
  • कामराज रत्नसार।

📌 महाराणा राजसिंह की स्थापत्य उपलब्धियां

🏗️ राजसिंह के निर्माण
  • राजसमंद झील: 1662-1676 ई. में निर्माण। [PDF p.3]
  • राजप्रशस्ति: विश्व की सबसे बड़ी शिलालेख प्रशस्ति — 25 काले पत्थरों पर रणछोड़ भट्ट तैलंग द्वारा संस्कृत में रचित, राजसमंद झील की नौचौकी पाल पर उत्कीर्ण। [PDF p.3, p.5]
  • नौचौकी पाल, अंबामाता मंदिर, सर्वश्रुतु विलास।

📌 अन्य प्रमुख स्थापत्य

  • जगदीश मंदिर (उदयपुर): महाराणा जगतसिंह प्रथम द्वारा निर्माण; प्रशस्ति के रचयिता: कृष्ण भट्ट[PDF p.5]
  • जगनिवास महल (Lake Palace): महाराणा जगतसिंह द्वितीय द्वारा निर्माण (उदयपुर)। [PDF p.5]
  • चावंड चित्रशैली: महाराणा प्रताप के समय प्रारंभ, अमरसिंह प्रथम के समय स्वर्णकाल (चित्रकार: निशारदीन)। [PDF p.5]
  • जैन कीर्ति स्तंभ (चित्तौड़): 7 मंजिला, 75 फीट, व्यापारी जीजाक शाह द्वारा निर्मित, भगवान आदिनाथ को समर्पित। [PDF p.5]
  • सज्जनगढ़ दुर्ग (मानसून पैलेस): महाराणा सज्जन सिंह द्वारा निर्माण। [PDF p.5]

📌 प्रमुख ग्रंथ एवं लेखक

विद्वान / ग्रंथाकारआश्रयदाता शासकमुख्य रचनाएं / ग्रंथ
कमलचंद्रतेजसिंह (1260 ई.)श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि — मेवाड़ शैली का प्रथम चित्रित ताड़पत्र ग्रंथ। [PDF p.8, p.14]
जयसिंह सूरीजैत्रसिंहहम्मीर मद मर्दन — भूताला युद्ध एवं इल्तुतमिश की पराजय का वर्णन। [PDF p.5]
मंडन (शिल्पी)महाराणा कुंभाप्रसाद मंडन, रूप मंडन (मूर्तिकला), देवमूर्ति प्रकरण, राजवल्लभ। [PDF p.3]
नाथामहाराणा कुंभावास्तु मंजरी (वास्तुशास्त्र)।
काब्ह व्यासमहाराणा कुंभाएकलिंग महात्म्य (प्रथम भाग 'राजवर्णन' कुंभा द्वारा लिखित)। [PDF p.3, p.5]
अत्रि एवं महेशमहाराणा कुंभाकीर्ति स्तंभ प्रशस्ति। [PDF p.3]
रणछोड़ भट्ट तैलंगमहाराणा राजसिंहराजप्रशस्ति (25 सर्गों में)। [PDF p.3, p.5]
कविराज श्यामलदासमहाराणा सज्जन सिंहवीर विनोद — मेवाड़ का विस्तृत व प्रामाणिक इतिहास। [PDF p.14]
केसरी सिंह बारहठमहाराणा फतेह सिंहचेतावनी रा चूंगट्या (13 सोरठे)। [PDF p.5]
कृष्ण भट्टमहाराणा जगतसिंह प्रथमजगन्नाथ राय प्रशस्ति। [PDF p.5]

📌 Maharana Kumbha's Architectural & Literary Works

⭐ Golden Age of Architecture
  • Victory Tower (Vijay Stambh): 1440-1448 AD, 9 stories, 122 feet high, 157 steps. Sculptors: Jaita and his sons Poma, Napa, Punja. Inscription: 'Kirti Stambh Prashasti' by Atri and Mahesh. Symbol of Rajasthan Police & RBSE. [PDF p.2, p.5]
  • Kumbhalgarh Fort: 36 km long wall, chief architect Mandan. [PDF p.2]
  • 32 Forts: Kumbhalgarh, Basanti, Machan, Bhomat, Achalgarh, etc. [PDF p.2, p.5]
  • Kumbhaswami Temple (Chittor/Kumbhalgarh).
📚 Literary Works
  • Sangeet Raj: Divided into 5 Ratnakoshas — Pathya, Geet, Vady, Nritya, Rasa. [PDF p.3, p.5]
  • Sangeet Mimamsa, Sangeet Kram Deepika, Sud Prabandh.
  • Rasika Priya: Commentary on Jayadev's 'Gita Govind'.
  • Chandi Shatak: Commentary on Banabhatta's work.
  • Kamraj Ratnasar.

📌 Maharana Raj Singh's Architectural Achievements

🏗️ Raj Singh's Constructions
  • Rajsamand Lake: Built in 1662-1676 AD. [PDF p.3]
  • Rajprashasti: World's largest inscription eulogy — composed in Sanskrit by Ranchod Bhatt Tailang on 25 black stones, engraved on the Nauchauki Pal of Rajsamand Lake. [PDF p.3, p.5]
  • Nauchauki Pal, Ambamata Temple, Sarvashrutu Vilas.

📌 Other Major Architecture

  • Jagdish Temple (Udaipur): Built by Maharana Jagat Singh I; inscription by Krishna Bhatt. [PDF p.5]
  • Jag Niwas Mahal (Lake Palace): Built by Maharana Jagat Singh II (Udaipur). [PDF p.5]
  • Chavand Painting Style: Started during Maharana Pratap's time, golden period under Amar Singh I (painter: Nisharuddin). [PDF p.5]
  • Jain Kirti Stambh (Chittor): 7 stories, 75 feet, built by merchant Jijak Shah, dedicated to Lord Adinath. [PDF p.5]
  • Sajjangarh Fort (Monsoon Palace): Built by Maharana Sajjan Singh. [PDF p.5]

📌 Major Texts & Authors

Scholar / AuthorPatron RulerMajor Works
KamalchandraTej Singh (1260 AD)Shravak Pratikramana Sutra Churni — first illustrated palm-leaf manuscript of Mewar style. [PDF p.8, p.14]
Jayasinh SuriJaitrasinhHammir Mad Mardan — description of Bhutala battle & defeat of Iltutmish. [PDF p.5]
Mandan (sculptor)Maharana KumbhaPrasad Mandan, Roop Mandan (sculpture), Devmurti Prakaran, Rajvallabh. [PDF p.3]
NathaMaharana KumbhaVastu Manjari (Vastu Shastra).
Kabha VyasMaharana KumbhaEkling Mahatmya (first part 'Rajavarnan' was written by Kumbha himself). [PDF p.3, p.5]
Atri & MaheshMaharana KumbhaKirti Stambh Prashasti. [PDF p.3]
Ranchod Bhatt TailangMaharana Raj SinghRajprashasti (in 25 cantos). [PDF p.3, p.5]
Kaviraj ShyamaldasMaharana Sajjan SinghVir Vinod — detailed authentic history of Mewar. [PDF p.14]
Kesari Singh BarahathMaharana Fateh SinghChetavani Ra Chungatya (13 verses). [PDF p.5]
Krishna BhattMaharana Jagat Singh IJagannath Rai Prashasti. [PDF p.5]
⚠️ Exam Trap — विजय स्तंभ vs जैन कीर्ति स्तंभ
  • विजय स्तंभ: 9 मंजिला, 122 फीट, महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित (सारंगपुर विजय पर), विष्णु को समर्पित।
  • कीर्ति स्तंभ (जैन): 7 मंजिला, 75 फीट, जीजाक शाह (जैन व्यापारी) द्वारा निर्मित, आदिनाथ को समर्पित।

8 प्रशासनिक एवं सैन्य शब्दावली / Administrative & Military Terms

📋 मेवाड़ की शासन व्यवस्था — महत्वपूर्ण शब्दावली
प्रधान: मुख्य सलाहकार
बख्शी: सैन्य वेतन अधिकारी
कोठारी: रसद व भंडार प्रमुख
सहेना: नगर सुरक्षा अधिकारी
हरावल: सेना का अग्रिम दस्ता (मेवाड़ में चंडावत सरदारों को हरावल में रहने का विशेषाधिकार)
चंद्रावल: सेना का पिछला दस्ता (हल्दीघाटी में पुंजा भील व पुरोहित गोपीनाथ)
पाशीब: दुर्ग पर चढ़ने हेतु मिट्टी का चक्रतरा
खालसा: सीधे राजा के नियंत्रण वाली भूमि
जागीर: सामंतों को दी गई भूमि
भोम: भोमिया राजपूतों को सेवा बदले भूमि
शासन: धार्मिक/चारणों को कर-मुक्त भूमि
👑 मेवाड़ की सामंती व्यवस्था (उमराव प्रणाली)
  • प्रथम श्रेणी (सोलह / उमराव): 16 बड़े जागीरदार। सलूंबर के रावत (चंडावत) को महाराणा का राजतिलक करने, हरावल दस्ते का नेतृत्व करने व अनुपस्थिति में राजधानी संभालने का विशेषाधिकार। [PDF p.15]
  • द्वितीय श्रेणी (बत्तीस): 32 मध्यम स्तर के जागीरदार।
  • तृतीय श्रेणी (गोल): छोटे सामंत तथा जागीरदारों की निजी सैनिक टुकड़ियां।
  • भोमिया: राज्य की रक्षा में प्राण देने वाले वीर जिन्हें कर-मुक्त भूमि दी गई।
📋 Mewar's Administration — Key Terminology
Pradhan: Chief Advisor
Bakhshi: Military Pay Officer
Kothari: Store & Supply Chief
Sahena: City Security Officer
Harawal: Army's Advance Detachment (Chandavat Sardars had the privilege of being in Harawal)
Chandrawal: Army's Rear Detachment (Punja Bhil & Purohit Gopinath were in Chandrawal at Haldighati)
Pashib: Earthen ramp to climb the fort
Khalasa: Land directly under the king's control
Jagir: Land given to feudal lords
Bhom: Land given to Bhomiya Rajputs for service
Shasan: Tax-free land given to religious/Charans
👑 Feudal System of Mewar (Umrao System)
  • First Class (Solah / Umrao): 16 major feudal lords. Rawat of Salumbar (Chandavat) had the privilege of performing the Maharana's coronation, leading the Harawal, and managing the capital in the Maharana's absence. [PDF p.15]
  • Second Class (Battis): 32 middle-level feudal lords.
  • Third Class (Gol): Small feudal lords and private military units of jagirdars.
  • Bhomiya: Brave warriors who gave their lives for the state and were given tax-free land.

9 स्मरणीय ट्रिक्स / Memory Tricks

📌 ट्रिक 1: महाराणा कुंभा के संगीत राज के 5 कोश
"पाठ्य और गीत पर वाद्य और नृत्य का रस आया"
  • पाठ्य रत्नकोश
  • गीत रत्नकोश
  • वाद्य रत्नकोश
  • नृत्य रत्नकोश
  • रस रत्नकोश
📌 ट्रिक 2: चित्तौड़ के तीन साके (वर्ष एवं शासक)
"1303 में रत्न, 1535 में विक्रम, 1568 में उदय"
  • 1303 — रावल रत्नसिंह
  • 1535 — विक्रमादित्य / रानी कर्मावती
  • 1568 — उदयसिंह / जयमल-पत्ता
📌 ट्रिक 3: महाराणा प्रताप के शिष्टमंडलों का क्रम (J-M-B-T)
Jalal Khan → Man Singh → Bhagwan Das → Todar Mal
  • Jalal Khan (नवंबर 1572)
  • Man Singh (जून 1573)
  • Bhagwan Das (अक्टूबर 1573)
  • Todar Mal (दिसंबर 1573)
📌 ट्रिक 4: मेवाड़ की राजधानियों का क्रम
"नागदा, आहड, चित्तौड़, कुंभलगढ़, उदयपुर, चावंड"
  • नागदा — बप्पा रावल
  • आहड — अल्लट
  • चित्तौड़ — जैत्रसिंह / राणा हम्मीर
  • कुंभलगढ़ — संकटकालीन
  • उदयपुर — उदयसिंह (1559)
  • चावंड — महाराणा प्रताप (1585)

10 एक-पंक्ति तथ्य / One-Liners

  1. बप्पा रावल का मूल नाम कालभोज था और उन्हें हरित ऋषि के आशीर्वाद से मेवाड़ का राज्य प्राप्त हुआ। [PDF p.15]
  2. मेवाड़ में सोने का प्रथम सिक्का (115 ग्रेन) बप्पा रावल ने चलाया। [PDF p.5]
  3. मेवाड़ में नौकरशाही का सर्वप्रथम गठन अल्लट (आलू रावल) ने किया। [PDF p.1]
  4. कुंवर चूड़ा को उनकी प्रतिज्ञा के कारण 'मेवाड़ का भीष्म पितामह' कहा जाता है। [PDF p.8]
  5. जावर की चांदी की खानों की खोज राणा लाखा (लक्षसिंह) के शासनकाल में हुई। [PDF p.8]
  6. सारंगपुर का युद्ध (1437 ई.) महाराणा कुंभा एवं मालवा के महमूद खिलजी प्रथम के बीच लड़ा गया। [PDF p.5]
  7. कुंभलगढ़ दुर्ग का मुख्य वास्तुकार मंडन था। [PDF p.2]
  8. आंवला-बांवला की संधि (1453 ई.) के द्वारा मेवाड़ व मारवाड़ की सीमा का निर्धारण सोजत (पाली) को बनाया गया। [PDF p.5]
  9. पाती पेरवेण परंपरा का पुनरुद्धार महाराणा सांगा ने किया। [PDF p.2]
  10. महाराणा सांगा की समाधि/छतरी मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में स्थित है। [PDF p.15]
  11. उदयसिंह ने 1559 ई. में उदयपुर शहर की स्थापना की। [PDF p.5]
  12. महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक 28 फरवरी 1572 को गोगुंदा में हुआ। [PDF p.15]
  13. महाराणा प्रताप के प्रसिद्ध घोड़े चेतक की छतरी बलीचा (राजसमंद) में है। [PDF p.15]
  14. प्रथम मुगल-मेवाड़ संधि 5 फरवरी 1615 को महाराणा अमरसिंह प्रथम एवं जहांगीर के मध्य हुई। [PDF p.5]
  15. औरंगजेब द्वारा 1679 ई. में आरोपित जजिया कर का कड़ा विरोध महाराणा राजसिंह ने किया। [PDF p.3]
  16. विश्व की सबसे बड़ी शिलालेख प्रशस्ति 'राजप्रशस्ति' रणछोड़ भट्ट तैलंग द्वारा रचित है। [PDF p.3]
  17. हूरड़ा सम्मेलन (17 जुलाई 1734) भीलवाड़ा में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता महाराणा जगतसिंह द्वितीय ने की। [PDF p.5]
  18. मेवाड़ भील कोर (MBC) की स्थापना 1841 ई. में महाराणा सरदार सिंह के समय हुई, मुख्यालय: खेरवाड़ा (उदयपुर)[PDF p.5]
  1. Bappa Rawal's original name was Kalabhoj and he received Mewar with the blessing of Harit Rishi. [PDF p.15]
  2. The first gold coin (115 grain) in Mewar was issued by Bappa Rawal. [PDF p.5]
  3. The first bureaucracy in Mewar was established by Allat (Alu Rawal). [PDF p.1]
  4. Kunwar Chuda is called 'Bhishma Pitamah of Mewar' due to his vows. [PDF p.8]
  5. The silver mines of Jawar were discovered during Rana Lakha's reign. [PDF p.8]
  6. The Battle of Sarangpur (1437 AD) was fought between Maharana Kumbha and Mahmud Khilji I of Malwa. [PDF p.5]
  7. The chief architect of Kumbhalgarh Fort was Mandan. [PDF p.2]
  8. The Treaty of Aanwala-Baanwala (1453 AD) fixed the boundary of Mewar and Marwar at Sojat (Pali). [PDF p.5]
  9. The Pati Pereven tradition was revived by Maharana Sanga. [PDF p.2]
  10. Maharana Sanga's cenotaph is at Mandalgarh (Bhilwara). [PDF p.15]
  11. Udai Singh established the city of Udaipur in 1559 AD. [PDF p.5]
  12. Maharana Pratap's first coronation was on 28 February 1572 at Gogunda. [PDF p.15]
  13. The cenotaph of Maharana Pratap's famous horse Chetak is at Balicha (Rajsamand). [PDF p.15]
  14. The first Mughal-Mewar treaty was signed on 5 February 1615 between Maharana Amar Singh I and Jahangir. [PDF p.5]
  15. Maharana Raj Singh strongly opposed the Jizya tax imposed by Aurangzeb in 1679 AD. [PDF p.3]
  16. The world's largest inscription eulogy 'Rajprashasti' was composed by Ranchod Bhatt Tailang. [PDF p.3]
  17. The Hurda Conference (17 July 1734) was held at Bhilwara, presided over by Maharana Jagat Singh II. [PDF p.5]
  18. The Mewar Bhil Corps (MBC) was established in 1841 AD during Maharana Sardar Singh's time, headquarters: Kherawada (Udaipur). [PDF p.5]

11 भ्रम निवारक तथ्य / Exam Traps

⚠️ ट्रैप 1: विजय स्तंभ vs जैन कीर्ति स्तंभ
  • विजय स्तंभ: 9 मंजिला, 122 फीट, महाराणा कुंभा, विष्णु को समर्पित
  • कीर्ति स्तंभ (जैन): 7 मंजिला, 75 फीट, जीजाक शाह, आदिनाथ को समर्पित
⚠️ ट्रैप 2: महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक
  • प्रथम राज्याभिषेक (आपदा काल): गोगुंदा में (28 फरवरी 1572)
  • दूसरा राज्याभिषेक (उत्सव): कुंभलगढ़ दुर्ग में
⚠️ ट्रैप 3: चावंड राजधानी अवधि
  • महाराणा प्रताप के समय: 1585 से 1597 (12 वर्ष)
  • कुल मिलाकर चावंड: 1585 से 1615 (30 वर्ष) — अमरसिंह प्रथम के समय तक
⚠️ ट्रैप 4: खानवा युद्ध की तिथि
  • NCERT/प्रामाणिक इतिहास: 17 मार्च 1527
  • कविराज श्यामलदास (वीर विनोद): 16 मार्च 1527
⚠️ ट्रैप 5: एकलिंग महात्म्य के लेखक
  • प्रथम भाग (राजवर्णन): महाराणा कुंभा स्वयं
  • संपूर्ण ग्रंथ: काब्ह व्यास (कुंभा के दरबारी)
⚠️ ट्रैप 6: हल्दीघाटी युद्ध के इतिहासकार एवं नाम
  • अबुल फजल: 'खमनौर का युद्ध'
  • बदायूंनी (प्रत्यक्षदर्शी): 'गोगुंदा का युद्ध'
  • कर्नल जेम्स टॉड: 'मेवाड़ की थर्मोपल्ली'

12 त्वरित रीविज़न शीट / Quick Revision

📋 QUICK REVISION: MEWAR HISTORY
  • संस्थापक: गृहादित्य (566 ई.) | वास्तविक संस्थापक: बप्पा रावल (734 ई.)
  • प्रथम नौकरशाही: अल्लट | राजधानी चित्तौड़ लाने वाला: जैत्रसिंह
  • प्रथम साका (1303): रत्नसिंह + पद्मिनी vs अलाउद्दीन खिलजी
  • सिसोदिया वंश संस्थापक: राणा हम्मीर (1326 ई., 'विषम घाटी पंचानन')
  • स्थापत्य का स्वर्णकाल: महाराणा कुंभा (32 दुर्ग, विजय स्तंभ, संगीत राज)
  • पाती पेरवेण: महाराणा सांगा (खानवा युद्ध, 1527)
  • मेवाड़ का मैराथन: दिवेर का युद्ध (1582) — महाराणा प्रताप
  • विश्व की सबसे बड़ी प्रशस्ति: राजप्रशस्ति (राजसमंद — रणछोड़ भट्ट)
  • प्रथम मुगल-मेवाड़ संधि: 1615 (अमरसिंह प्रथम व जहांगीर)
  • ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि: 1818 (महाराणा भीमसिंह)
⭐ RAS Exam Booster — प्रशासनिक शब्दावली पर विशेष ध्यान
  • हरावल: सेना का अग्रिम दस्ता (चंडावत सरदार)
  • चंद्रावल: सेना का पिछला दस्ता
  • उमराव: मेवाड़ के 16 प्रथम श्रेणी सामंत
  • भोमिया: कर-मुक्त भूमि पाने वाले वीर

13 PYQ मैपिंग / Previous Year Questions

  • 2013: चित्तौड़ के साकों से संबंधित प्रश्न (प्रथम, द्वितीय, तृतीय)
  • 2016: महाराणा कुंभा की स्थापत्य एवं साहित्यिक उपलब्धियां (विजय स्तंभ, संगीत राज)
  • 2018: खानवा युद्ध (1517) एवं महाराणा सांगा की भूमिका
  • 2021: मुगल-मेवाड़ संबंध एवं 1615 की संधि की शर्तें
  • 2023: हल्दीघाटी एवं दिवेर युद्ध की तुलना
  • 2024: महाराणा राजसिंह का जजिया कर विरोध एवं राजप्रशस्ति
⭐ Exam BoosterRPSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार मेवाड़ इतिहास से पूछे जाने वाले उच्च प्राथमिकता वाले 3 क्षेत्र:
  1. मुगल-मेवाड़ संबंध एवं संधियां: 1615 की संधि की शर्तें
  2. सांस्कृतिक/साहित्यिक दरबारी: कुंभा के दरबारी (मंडन, नाथा, काब्ह व्यास) व राजसिंह के समय के स्थापत्य
  3. युद्ध भूमियों की भौगोलिक स्थिति: बयाना व खानवा (रूपवास, भरतपुर), गागरोन (झालावाड़), खातोली (पीपलदा, कोटा), दिवेर व हल्दीघाटी (राजसमंद)
  • 2013: Question related to the Sakas of Chittor
  • 2016: Maharana Kumbha's architectural & literary achievements (Vijay Stambh, Sangeet Raj)
  • 2018: Battle of Khanwa (1527) and Maharana Sanga's role
  • 2021: Mughal-Mewar relations and terms of the 1615 treaty
  • 2023: Comparison of Haldighati and Diver battles
  • 2024: Maharana Raj Singh's Jizya opposition and Rajprashasti
⭐ Exam BoosterAccording to RPSC's latest pattern, the high-priority areas from Mewar history:
  1. Mughal-Mewar relations & treaties: Terms of the 1615 treaty
  2. Cultural/literary courtiers: Kumbha's courtiers (Mandan, Natha, Kabha Vyas) and Raj Singh's architecture
  3. Battlefield locations: Bayana & Khanwa (Rupwas, Bharatpur), Gagron (Jhalawar), Khatoli (Piplada, Kota), Diver & Haldighati (Rajsamand)

14 समसामयिक जुड़ाव / Current Affairs

📰 नवीनतम पुरातात्विक व धरोहर अपडेट (2024-2025)
  • दिवेर एवं चावंड पैनोरमा: राजस्थान सरकार द्वारा महाराणा प्रताप के विजय स्थल दिवेर एवं अंतिम राजधानी चावंड में नए पैनोरमा व लाइट एंड साउंड शो के लिए विशेष बजट आवंटित। [PDF p.2]
  • हल्दीघाटी राष्ट्रीय स्मारक प्रस्ताव: ASI द्वारा हल्दीघाटी एवं आसपास के युद्ध क्षेत्रों (रक्त तलाई, चेतक समाधि) के संरक्षण हेतु एकीकृत मास्टर प्लान लागू। [PDF p.2]
सत्यापन आवश्यकइन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति परीक्षा-पूर्व राजस्थान पुरातत्व विभाग एवं पर्यटन विभाग की वेबसाइट से पुनः जाँचें।
📰 Latest Archaeological & Heritage Updates (2024-2025)
  • Diver and Chavand Panorama: Rajasthan Government has allocated a special budget for new panoramas and light & sound shows at Maharana Pratap's victory site Diver and last capital Chavand. [PDF p.2]
  • Haldighati National Monument Proposal: ASI has implemented an integrated master plan for the conservation of Haldighati and surrounding battlefields (Rakht Talai, Chetak Samadhi). [PDF p.2]
Verification NeededRe-check the current status of these projects from the official Rajasthan Archaeology & Tourism Department websites before the exam.

15 अभ्यास MCQs / Practice MCQs

1. मेवाड़ में सोने का प्रथम सिक्का किस शासक ने चलाया?
2. 'विषम घाटी पंचानन' किसे कहा जाता है?
3. चित्तौड़ का प्रथम साका किस वर्ष हुआ था?
4. महाराणा कुंभा द्वारा रचित 'संगीत राज' कितने कोशों में विभक्त है?
5. 'पाती पेरवेण' प्रथा का पुनरुद्धार किसने किया?
6. महाराणा प्रताप ने किस वर्ष चावंड को राजधानी बनाया?
7. विश्व की सबसे बड़ी शिलालेख प्रशस्ति 'राजप्रशस्ति' किस झील के किनारे स्थित है?
8. दिवेर के युद्ध को कर्नल टॉड ने क्या कहा है?
9. प्रथम मुगल-मेवाड़ संधि किस वर्ष हुई थी?
10. चित्तौड़ के तृतीय साके (1568 ई.) में केसरिया का नेतृत्व किसने किया?
1. Who issued the first gold coin in Mewar?
2. Who is called 'Visham Ghati Panchanan'?
3. In which year did the First Saka of Chittor take place?
4. How many Koshas is Maharana Kumbha's 'Sangeet Raj' divided into?
5. Who revived the 'Pati Pereven' tradition?
6. In which year did Maharana Pratap make Chavand his capital?
7. Near which lake is the world's largest inscription eulogy 'Rajprashasti' located?
8. What did Colonel Todd call the Battle of Diver?
9. In which year was the first Mughal-Mewar treaty signed?
10. Who led the Kesariya in the Third Saka of Chittor (1568 AD)?
📚 स्रोत / Sources RPSC आधिकारिक पाठ्यक्रम (09-01-2026) · NCERT · कर्नल जेम्स टॉड 'एनल्स एंड एंटिक्विटीज़ ऑफ़ राजस्थान' · कविराज श्यामलदास 'वीर विनोद' · दशरथ शर्मा 'राजस्थान का इतिहास' · डॉ. गोपीनाथ शर्मा · ASI रिपोर्ट्स · राजस्थान राज्य पुरातत्व विभाग · मास्टर-क्लास नोट्स।