संवैधानिक एवं सांविधिक आयोग

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पाठ्यक्रम के सभी आयोगों की मास्टर सारणी

क्र. आयोग का नाम संवैधानिक / सांविधिक आधार स्थापना तिथि
1भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI)अनुच्छेद 32425 जनवरी 1950
2राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)अनुच्छेद 243K / 243ZA1994
3संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)अनुच्छेद 315 - 3231 अक्टूबर 1926
4राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)अनुच्छेद 31520 अगस्त 1949
5लोकपाल (Lokpal)लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 20132019
6राजस्थान लोकायुक्तराजस्थान लोकायुक्त अधिनियम, 19731973
7राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)महिला आयोग अधिनियम, 199031 जनवरी 1992
8राजस्थान राज्य महिला आयोगराज्य महिला आयोग अधिनियम, 19992000
9केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)RTI अधिनियम, 20052005
10राजस्थान राज्य सूचना आयोगRTI अधिनियम, 20052005

PART-1: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI)

1.1 संवैधानिक आधार (अनुच्छेदवार वर्गीकरण)

  • अनुच्छेद 324: निर्वाचन आयोग की स्थापना, अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण की व्यापक शक्ति।
  • अनुच्छेद 325: धर्म, नस्ल, जाति, लिंग के आधार पर निर्वाचक नामावली में नाम जोड़ने से नहीं रोका जाएगा (समान मतदाता सूची)।
  • अनुच्छेद 326: वयस्क मताधिकार (61वाँ संशोधन 1988 द्वारा आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई)।
  • अनुच्छेद 327: संसद को निर्वाचन के संबंध में नियम/विधि बनाने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 328: राज्य विधानमंडल को अपने चुनावों के संबंध में विधि बनाने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 329: निर्वाचन मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप वर्जित (केवल चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती)।

1.2 स्थापना एवं संरचना का इतिहास

वर्ष / तिथि संवैधानिक एवं ऐतिहासिक घटनाक्रम
25 जनवरी 1950ECI की स्थापना (इसी याद में प्रतिवर्ष राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है)।
1950 - 1989आयोग पूर्णतः एकल सदस्यीय था (केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त - CEC)।
अक्टूबर 1989वी.पी. सिंह सरकार ने पहली बार दो अन्य निर्वाचन आयुक्त (ECs) नियुक्त किए (अल्पकाल हेतु)।
जनवरी 1990नरसिम्हा राव सरकार ने पुनः इसे बदलकर एकल सदस्यीय कर दिया।
अक्टूबर 1993स्थायी रूप से तीन सदस्यीय निकाय (1 CEC + 2 EC) बना दिया गया, जो आज भी जारी है।
2023 का नया अधिनियम (Syllabus Upgradation)
Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023:
इसके तहत चयन समिति की संरचना पूरी तरह बदल दी गई है:
  1. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
  2. एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (प्रधानमंत्री द्वारा नामित)
  3. लोकसभा में विपक्ष का नेता (LOP) या सबसे बड़े विपक्षी दल का नेता
विवाद का विषय: 2023 के इस एक्ट से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने अनूप बरनवाल केस (2023) में आदेश दिया था कि चयन समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भी होने चाहिए, लेकिन संसद ने कानून बनाकर CJI को बाहर कर दिया।

1.3 योग्यताएं, कार्यकाल एवं सेवा शर्तें

  • योग्यता: मूल संविधान में कोई स्पष्ट योग्यता नहीं है। व्यावहारिक रूप से वरिष्ठ IAS अधिकारियों को नियुक्त किया जाता है। 2023 एक्ट के अनुसार उम्मीदवार भारत सरकार के सचिव पद के समकक्ष होना चाहिए।
  • कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)। सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं होती।
  • वेतन: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान (₹2,50,000/माह)।
  • हटाने की विधिक प्रक्रिया: CEC को केवल सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की भांति ही हटाया जा सकता है (संसद के दोनों सदनों में उपस्थित व मतदान करने वालों का 2/3 विशेष बहुमत)। जबकि अन्य ECs को राष्ट्रपति केवल CEC की सिफारिश पर हटा सकते हैं।

1.4 प्रमुख मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की सूची एवं योगदान

  • अतिरिक्त परीक्षा उपयोगी तथ्य: श्रीमती वी.एस. रमादेवी (1990 में) ECI की एकमात्र महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त (कार्यकारी) रही हैं।
  • क्र. नाम कार्यकाल महत्वपूर्ण योगदान / विशिष्ट तथ्य
    1सुकुमार सेन1950 - 1958स्वतंत्र भारत के प्रथम CEC; पहले दो आम चुनावों (1952, 1957) का सफल संचालन।
    2K.V.K. सुंदरम1958 - 19671962 और 1967 के आम चुनावों का प्रबंधन।
    5S.L. शकधर1973 - 1977आपातकाल (इमरजेंसी) के तुरंत बाद ऐतिहासिक 1977 का चुनाव कराया।
    8टी.एन. शेषन (T.N. Seshan)1990 - 1996क्रांतिकारी चुनाव सुधार; आदर्श आचार संहिता (MCC) की सख्ती, फोटो युक्त वोटर ID की शुरुआत।
    10J.M. लिंगदोह2001 - 2004गुजरात दंगे (2002) के बाद वहाँ चुनाव कराने के विधिक विवाद और सुधारों हेतु प्रसिद्ध।
    14S.Y. कुरैशी2010 - 2012मतदाता शिक्षा और जागरूकता के लिए प्रसिद्ध SVEEP कार्यक्रम प्रारंभ किया।
    17नसीम जैदी2015 - 2017NOTA और EVM-VVPAT के व्यापक स्तर पर तकनीकी सुधार।
    22राजीव कुमार2022 - 2025ऐतिहासिक 2024 के लोकसभा चुनावों का संचालन।
    23ज्ञानेश कुमार2025 - वर्तमानवर्तमान में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं।

    PART-2: राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)

    2.1 संवैधानिक ढांचा

    • अनुच्छेद 243K: पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण हेतु राज्य निर्वाचन आयोग का गठन।
    • अनुच्छेद 243ZA: नगरीय निकायों (नगर पालिकाओं/नगर निगमों) के चुनावों का दायित्व।
    • यह आयोग 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत स्थापित हुआ। राजस्थान में इसकी स्थापना 1994 में की गई।

    2.2 संरचना एवं विधिक स्थिति

    भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की भांति यह तीन सदस्यीय नहीं है। राजस्थान का राज्य निर्वाचन आयोग मात्र एकल सदस्यीय निकाय है, जिसमें केवल 'राज्य निर्वाचन आयुक्त' (SEC) होते हैं।

    📊 ECI बनाम राजस्थान SEC (तुलनात्मक चार्ट)
    बिंदु भारत निर्वाचन आयोग (ECI) राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)
    संवैधानिक आधारअनुच्छेद 324अनुच्छेद 243K / 243ZA
    सदस्य संख्या3 (1 CEC + 2 EC)केवल 1 (SEC)
    नियुक्ति प्राधिकारीराष्ट्रपतिराज्यपाल
    कार्यक्षेत्रलोकसभा, राज्यसभा, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, विधानसभास्थानीय पंचायतें एवं नगरीय निकाय
    पद से हटानासंसद के विशेष बहुमत द्वाराउच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भांति (राष्ट्रपति द्वारा)

    2.3 सेवा शर्तें एवं आयुक्तों की सूची

    • कार्यकाल: 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)। (ध्यान दें: ECI में 6 वर्ष है, यहाँ 5 वर्ष है)।
    • हटाने की प्रक्रिया: इसे केवल उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (राज्यपाल नियुक्त तो करते हैं, परंतु पद से हटा नहीं सकते)।
    • राजस्थान के प्रमुख आयुक्त: अमर सिंह राठौड़ (प्रथम आयुक्त), एन.आर. भसीन, इंदरजीत खन्ना, ए.के. पाण्डे, पी.एस. मेहरा, मधुकर गुप्ता और वर्तमान में सी.एस. राजन इसके प्रमुख स्तंभ रहे हैं।

    PART-3: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)

    3.1 अनुच्छेदवार संवैधानिक उपबंध (भाग 14)

    अनुच्छेद विषय वस्तु / विधिक प्रावधान
    अनुच्छेद 315संघ और राज्यों के लिए एक लोक सेवा आयोग (UPSC / SPSC) की स्थापना।
    अनुच्छेद 316सदस्यों की नियुक्ति, योग्यताएं एवं कार्यकाल।
    अनुच्छेद 317लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को पद से हटाने या निलंबित करने की प्रक्रिया।
    अनुच्छेद 318आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों के संबंध में नियम बनाने की शक्ति (राष्ट्रपति को)।
    अनुच्छेद 319आयोग के सदस्यों द्वारा पद पर न रहने के पश्चात अन्य सरकारी रोजगारों पर प्रतिबंध।
    अनुच्छेद 320लोक सेवा आयोगों के कर्तव्य और प्रमुख प्रशासनिक कार्य।
    अनुच्छेद 321लोक सेवा आयोग के कार्यों का विस्तार करने की शक्ति (संसद को)।
    अनुच्छेद 322आयोग के खर्च (वेतन-भत्ते) भारत की संचित निधि पर भारित होंगे।
    अनुच्छेद 323UPSC अपना वार्षिक प्रतिवेदन प्रतिवर्ष राष्ट्रपति को सौंपेगा।

    3.2 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    • 1854 (मैकाले रिपोर्ट): योग्यता पर आधारित सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करने का सर्वप्रथम सुझाव।
    • 1 अक्टूबर 1926 (ली आयोग की सिफारिश पर): 'Federal Public Service Commission' की स्थापना की गई (सर रॉस बार्कर इसके प्रथम अध्यक्ष थे)।
    • 26 जनवरी 1950: स्वाधीनता के पश्चात इसका नाम बदलकर 'Union Public Service Commission' (UPSC) कर दिया गया और संवैधानिक दर्जा मिला।

    3.3 संरचना, सेवा शर्तें एवं पद से हटाना

    • संरचना: 1 अध्यक्ष + अधिकतम 10 सदस्य (संख्या राष्ट्रपति तय करते हैं)। विशेष नियम: आयोग के कम से कम आधे सदस्यों को केंद्र या राज्य सरकार के अधीन न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा का प्रशासनिक अनुभव होना अनिवार्य है।
    • कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)। पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते।
    • हटाने के आधार (अनुच्छेद 317): राष्ट्रपति दिवालियापन, शारीरिक/मानसिक अक्षमता या लाभ के पद पर होने के आधार पर हटा सकते हैं। परंतु 'सिद्ध कदाचार' (Proved Misbehaviour) के मामले में राष्ट्रपति बिल को उच्चतम न्यायालय (SC) को जांच हेतु भेजते हैं। SC की जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होती है।
    • वर्तमान नेतृत्व (2026): मनोज सोनी के इस्तीफे के बाद वर्तमान में प्रीति सूदन आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं (नोट: रोज मिलियन बैथ्यू सिविल सेवा इतिहास की पहली महिला अध्यक्ष रही हैं)।

    PART-4: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)

    4.1 स्थापना एवं कानूनी आधार

    • 20 अगस्त 1949: अध्यादेश के माध्यम से RPSC की स्थापना जयपुर में की गई थी। इसके प्रथम अध्यक्ष तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस.के. घोष बने थे।
    • बाद में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर इसके मुख्यालय को जयपुर से अजमेर (घूघरा घाटी) स्थानांतरित कर दिया गया।
    • 26 जनवरी 1950 से इसे अनुच्छेद 315 के तहत पूर्ण संवैधानिक दर्जा मिला। इसके कार्यों को संचालित करने हेतु RPSC Regulations, 1963 प्रभावी हैं।

    4.2 संरचना एवं विधिक नियम

    • संरचना: वर्तमान में 1 अध्यक्ष + 8 सदस्य (कुल 9 सदस्यीय संरचना)। सदस्यों की संख्या निर्धारित करने का विधिक अधिकार राज्यपाल में निहित है।
    • कार्यकाल (टॉपर स्पेशल ध्यान दें): 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)। (UPSC में यह आयु सीमा 65 वर्ष है, यही सबसे बड़ा अंतर है)।
    • वेतन व खर्च: RPSC के अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन-भत्ते राजस्थान की संचित निधि पर भारित होते हैं, इसलिए इनके कार्यकाल के दौरान इनमें कोई हानिकारक बदलाव नहीं किया जा सकता।
    • हटाने का अनूठा नियम (अनुच्छेद 317): RPSC के सदस्यों की नियुक्ति तो राज्य के राज्यपाल करते हैं, परंतु 'सिद्ध कदाचार' के आधार पर इन्हें पद से हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है (सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट के बाद)। राज्यपाल केवल जांच के दौरान इन्हें निलंबित कर सकते हैं, हटा नहीं सकते।
    📊 UPSC vs RPSC (क्विक रिवीजन चार्ट)
    प्रशासनिक बिंदु संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)
    आयु सीमा65 वर्ष62 वर्ष
    नियुक्ति प्राधिकारीराष्ट्रपतिराज्यपाल
    व्यय / खर्च का स्रोतभारत की संचित निधिराज्य की संचित निधि
    कदाचार पर हटानाराष्ट्रपति द्वाराराष्ट्रपति द्वारा (राज्यपाल नहीं हटा सकते)
    वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुतीकरणराष्ट्रपति को (संसद के सम्मुख)राज्यपाल को (विधानसभा के सम्मुख)
    मुख्यालयनई दिल्लीअजमेर

    PART-5: लोकपाल (Lokpal) - सांविधिक संस्थान

    5.1 वैधानिक आधार एवं इतिहास

    • यह एक गैर-संवैधानिक, सांविधिक (Statutory) निकाय है, जिसका गठन लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत किया गया है।
    • यह संस्था स्वीडन के 'Ombudsman' (1809) की तर्ज पर भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध काम करती है। भारत में इसके लिए पहला प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में बना था, जिसने लोकपाल शब्द की वकालत की (यह शब्द डॉ. एल.एम. सिंघवी ने दिया था)।
    • वर्ष 2011 के अन्ना हजारे के देशव्यापी आंदोलन के बाद यह कानून 2013 में संसद से पास हुआ और 23 मार्च 2019 को देश के पहले लोकपाल (जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष) की नियुक्ति की गई।

    5.2 संरचना एवं चयन समिति (Selection Committee)

    लोकपाल संस्थान में 1 अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य हो सकते हैं। इसमें विधिक रूप से $50\%$ सदस्यों का न्यायिक पृष्ठभूमि (Judicial) से होना अनिवार्य है, तथा $50\%$ सदस्य SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक या महिला होने चाहिए।

    लोकपाल की उच्च स्तरीय चयन समिति
    अधिनियम के अनुसार, लोकपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक 5-सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है:
    1. प्रधानमंत्री (चयन समिति के अध्यक्ष)
    2. लोकसभा अध्यक्ष (Speaker)
    3. लोकसभा में विपक्ष का नेता (LOP)
    4. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उनके द्वारा नामित उच्चतम न्यायालय के कोई न्यायाधीश
    5. राष्ट्रपति द्वारा नामित एक प्रख्यात कानूनविद (Eminent Jurist)

    5.3 अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) एवं कार्यकाल

    • कार्यकाल: 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)। सेवानिवृत्ति के बाद ये किसी भी सरकारी पद के योग्य नहीं होते।
    • अधिकार क्षेत्र का दायरा: लोकपाल के दायरे में **प्रधानमंत्री (PM)** भी शामिल हैं (परंतु सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मामलों को छोड़कर)। इसके अतिरिक्त सभी केंद्रीय मंत्री, सांसद, और ग्रुप A, B, C, D के सभी लोकसेवक इसके दायरे में आते हैं।
    • हटाने की प्रक्रिया: संसद के कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर वाले आरोप पत्र पर राष्ट्रपति मामले को सुप्रीम कोर्ट की जांच पीठ को भेजते हैं, जिसके बाद ही इन्हें पद से हटाया जा सकता है।